मुरादाबाद। मेट्रो शहरों की तर्ज पर मुरादाबाद में भी लिव इन रिलेशनशिप का चलन बढ़ रहा है। लेकिन कुछ समय बाद आपसी सामंजस्य के अभाव की वजह से जब युगल अलग होते हैं तो युवतियों को अपनी इज्जत की चिंता सताने लगती है। वन स्टॉप सेंटर में लगातार युवतियों की शिकायतें आ रही हैं। काउंसलर का कहना है कि सितंबर महीने में 89 शिकायतों में से करीब दस शिकायतें रिश्ते टूटने के बाद निजी बातें उजागर होने के डर से संबंधित हैं। लिव इन रिलेशनशिप के अधिकतर मामले 17 साल से लेकर 25 वर्ष तक की युवतियाें से संबंधित हैं। काउंसलर का कहना है कि अधिक संख्या में ताे युवतियां ही प्रभावित हैं, लेकिन कुछ मामलों में देखा गया है कि युवतियों ने भी अपने साथी को धोखा दिया है। यदि पिछले वर्ष से तुलना करेंगे तो इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी ही दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के हिसाब से लिव इन रिलेशनशिप में सिर्फ शहर के ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं का रुझान बढ़ा है।
केस एक
गर्भवती होने पर छोड़ गया युवक
बदायूं जनपद निवासी 22 वर्षीय एक युवती मुरादाबाद के एक कॉलेज में पढ़ने के लिए आई थी। वह करीब 25 साल के एक युवक से प्रेम करने लगी। युवक एक निजी संस्थान में नौकरी कर रहा था। बाद में वह उस युवती को लेकन दिल्ली चला गया। युवती का आरोप है कि वहां पर जब वह नौ महीने की गर्भवती थी तो युवक उसे छोड़कर कहीं चला गया। उसका आधार कार्ड से जानकारी हासिल करनी चाही तो आधार कार्ड फर्जी था। युवती को युवक के परिवार या घर की कोई जानकारी नहीं है। बाद में वह एक महिला वकील के माध्यम से वन स्टॉप सेंटर पहुंची। यहां से युवती के पिता लेकर गए।
केस दो
जांच में युवक निकला पीड़ित
तहसील बिलारी क्षेत्र की 24 वर्षीय युवती को कोचिंग के दौरान पड़ोस के गांव के 28 वर्षीय युवक से प्रेम हो गया। बिना शादी के साथ में रहने लगे। इसके बाद वह नौकरी के लिए दिल्ली चली गई। एक दिन 181 पर कॉल कर उसने युवक द्वारा परेशान करने और व्यक्तिगत फोटो को सार्वजनिक करने की धमकी देने की शिकायत की। वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर ने जब मामले की जांच की तो पता चला कि युवती के तीन-चार अन्य युवकों से संबंध हो गए थे और वह युवक से पैसे हड़पने के उद्देश्य से उसके खिलाफ शिकायत कर रही थी।
केस तीन
सरकारी नौकरी मिलने पर युवती को छोड़ा कांठ निवासी 24 साल की युवती और ठाकुरद्वारा निवासी 26 साल का युवक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान एक-दूसरे से मिले। शादी का वायदा कर साथ रहने लगे। इस रिश्ते के बारे में युवती के परिजनों को जानकारी थी। शादी के लिए युवक की नौकरी लगे का इंतजार कर रहे थे। सरकारी नौकरी लगने के बाद युवक ने शादी करने से इन्कार कर दिया। काउंसलर ने समझाने का प्रयास किया। बात नहीं बनने पर युवती को भविष्य में कभी परेशान न करने के आश्वासन पर दोनाें अलग हो गए।
केस चार
सोशल मीडिया पर मिले, साथ रहे और अलग हो गए
कुंदरकी निवासी 19 वर्षीय युवक की सोशल मीडिया पर दिल्ली निवासी एक 17 वर्षीय युवती से दोस्ती हो गई। इसके बाद युवक ने दिल्ली जाकर युवती से मुलाकात की और कुछ समय दोनों साथ रहे। युवक ने शादी के लिए अपनी मम्मी से भी युवती की बात करवाई। बाद में युवक शादी करने से मुकर गया। युवती के मुरादाबाद आने पर उसके साथ अभद्रता भी की गई। इसके बावजूद युवती उसी युवक से शादी करना चाहती थी। हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए।
नोट...युवक-युवतियों की गोपनीयता के लिए उनके निवास स्थान के नाम बदले गए हैं। इस माह के आंकड़े 17 सितंबर तक के हैं।
लिव इन रिलेशनशिप में आने और अलग होने के कारण...
- कुछ मामलों में दोनों कामकाजी होना और एक-दूसरे को समय न देना
- दोस्तों का दबाव
- एक-दूसरे पर भरोसा न करना
- मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल करना
- अभिभावकों का बच्चों के साथ कम संवाद होना
- अभिभावकों द्वारा कई बार बच्चों पर हद से ज्यादा भरोसा करना
- युवकों द्वारा पहली शादी को छुपाकर दूसरी युवती को शादी का आश्वासन देना
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वन स्टॉप सेंटर में दर्ज हुए मामले - 2932
माह 2024 2025
अप्रैल 32 86
मई 60 82
जून 48 79
जुलाई 63 77
अगस्त 81 59
सितंबर 70 89
वर्जन...
कई महिलाएं घरेलू हिंसा के केस दर्ज करवाती हैं। काउंसलिंग के दौरान पता चलता है कि उनका पति दूसरी युवती के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा है। हर दिन एक-दो कॉल आती हैं, जिनमें युवतियां बताती हैं कि उन्हें छोड़ दिया गया। शोषण किया गया या फिर गर्भपात के लिए मजबूर किया गया। कुछ युवतियां ऐसी भी होती हैं जो यह गुजारिश करती हैं कि युवक के फोन से उनके फोटो डिलीट करवा दिए जाएं, ताकि उन्हें भविष्य में बदनामी का डर न सताए।
गुंजन शर्मा, प्रभारी, वन स्टॉप सेंटर
लिव इन रिलेशनशिप में कुछ युवा शादी के लिए अपना भविष्य देखते हैं तो कुछ इसे सिर्फ प्रयोग के तौर पर लेते हैं। ऐसे में जब चीजें सामान्य नहीं रहतीं तो युवा खुद को जिम्मेदार मानकर अवसाद में चले जाते हैं। रिश्ता कोई भी हो, सांमजस्य से ही चलता है। जीवन आगे की तरफ देखने के लिए है। आत्मग्लानि या आत्महत्या जैसे विचार आएं तो मनोचिकित्सक, सलाहकार, दोस्त या अभिभावकों से बात करें। किसी से परामर्श लेने से न हिचकिचाएं।
डॉ. सुनील चौधरी, प्रोफेसर मनोविज्ञान विभाग व प्राचार्य, केजीके कॉलेज
लिव इन रिलेशनशिप व्यक्ति और समाज के बीच बढ़ रही दूरी और संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ते चलन का परिणाम है। विवाह, परिवार जैसी संस्था पर व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा भारी पड़ रही है। बच्चे भावनात्मक लगाव बाहर देख रहे हैं। समय रहते हमें आपसी संवाद को मजबूत करना होगा, ताकि आने वाली पीढ़ी परिवार व समाज के महत्व को समझ सके।
डॉ. अजीत दीक्षित, अध्यक्ष समाजशास्त्र विभाग, एमएच कॉलेज