बिलारी। स्थानीय तहसील में तहसीलदार न्यायिक और वकीलों का बीते एक माह से चल रहा गतिरोध मंगलवार दोपहर वार्ता के बाद समाप्त हो गया। बार पदाधिकारियों ने युवा वकीलों की समस्याएं बताईं। तहसीलदार न्यायिक के आश्वासन के बाद उनकी अदालत में न्यायिक कार्य बहिष्कार का फैसला वापस लेने का निर्णय लिया गया।
तहसीलदार न्यायिक बिलारी की अदालत में एक राजस्व वाद में पारित एक पक्षीय आदेश के खिलाफ दिए गए बाजवा नंबर प्रार्थना पत्र की नियमानुसार सुनवाई न किए जाने का आरोप लगाते हुए वकीलों की शिकायत पर तहसील बार एसोसिएशन बिलारी ने बीती 28 नवंबर को तहसीलदार न्यायिक की अदालत में न्यायिक कार्यों का बेमियादी बहिष्कार कर दिया था। बार एसोसिएशन ने तहसीलदार न्यायिक कार्यशैली की जांच कराए जाने की मांग की थी। वकीलों द्वारा न्यायिक कार्य बहिष्कार लंबा खींचने की वजह से तहसीलदार न्यायिक की अदालत में राजस्व वादों के निस्तारण में विलंब हो रहा था। तहसीलदार न्यायिक कमलेश कुमार ने विवाद निपटाने के लिए वकीलों से वार्ता की पहल की।
मंगलवार दोपहर बाद एसडीएम न्यायिक की अदालत में तहसीलदार न्यायिक और बार एसोसिएशन पदाधिकारियों के बीच एक घंटे तक वार्ता चली। इस दौरान बार पदाधिकारियों ने बैनामों के दाखिल खारिज की गैर विवादित फाइलों में निर्धारित समय पर आदेश होने, अदालत के आदेशों का जल्दी अमल होने, युवा वकीलों को अनावश्यक परेशान न किए जाने आदि मांगें रखीं। तहसीलदार न्यायिक ने सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। वार्ता के बाद वकीलों ने बीती 28 नवंबर से चला आ रहा न्यायिक कार्य के बेमियादी बहिष्कार का निर्णय वापस ले लिया। वार्ता में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, महासचिव सुनील कुृमार, पूर्व अध्यक्ष भगवान शरण माथुर, पूर्व अध्यक्ष अजयपाल सिंह, पूर्व अध्यक्ष चेतन्यपाल सिंह, पूर्व सचिव अनोद कुमार सिंह, जबर सिंह, सौरभ सिंह, परमजीत सिंह, तेजप्रताप सिंह, मनोहर सिंह, कुंवरपाल सिंह, मोहित कुमार,नाजिम उस्मानी, पप्पू राजपूत, अतर सिंह, बिशन सिंह, तहजीब आलम आदि रहे।