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Moradabad News: शहर में पालूत कुत्ते डेढ़ हजार, लाइसेंस सिर्फ 178

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मुरादाबाद। पालतू कुत्तों के लाइसेंस बनाने में निगम द्वारा बरती जा रही लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। शहर में लगभग 1500 से अधिक लोग कुत्ता पाल रहे हैं, लेकिन निगम की ओर से महज 178 कुत्तों का ही लाइसेंस जारी किया गया है। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो बिना रजिस्ट्रेशन कराए ही कुत्ता पाल रहे हैं। इनमें से कई लोगों ने प्रतिबंधित कुत्ते भी पाल रखे हैं। नियमित टीकाकरण न होने से कुत्ते लोगों के लिए खतरा बन रहे हैं। साथ ही निगम को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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नगर निगम की ओर से जारी पालतू कुत्ते का लाइसेंस एक साल के लिए वैध होता है। लाइसेंस नहीं लेने वाले पशु स्वामी पर जुर्माना भी लगाने का प्रावधान है। पशु स्वामियों के लाइसेंस की वैधता 31 मार्च तक रहती है। इसके बाद एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक लोगों को लाइसेंस का नवीनीकरण कराना पड़ता है। मई के बाद नवीनीकरण करने पर जुर्माना देना होता है। निगम में रजिस्ट्रेशन कराते समय पशु स्वामियों को पशु चिकित्सक से इस बात का प्रमाणपत्र देना होता है कि उन्होंने पालतू कुत्ते का एंटी रैबीज वैक्सीनेशन व चेकअप करा लिया है। इसका प्रमाणपत्र जमा करने के बाद ही निगम शर्तों के साथ लाइसेंस जारी करता है।
चालू वित्तीय वर्ष में निगम ने भले ही इन कुत्तों के पंजीकरण से 2.61 लाख रुपये की कमाई की हो और प्रदेश में कुत्तों के रजिस्ट्रेशन से सबसे ज्यादा कमाई करने के मामले में पांचवा स्थान हासिल किया हो, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोगों ने पालतू कुत्ते का पंजीकरण नहीं कराया है।
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- कुत्ता पालने वालों के लिए ये हैं शर्तें

पालतू कुत्ता रखने वाले व्यक्ति को निगम की ओर से लाइसेंस लेना अनिवार्य रहता है। निगम लाइसेंस देने के साथ कुछ शर्तें भी रखता है। जिसके अनुसार पशु स्वामी को यह सुनिश्चित करना होगा कि पालतू कुत्ते से सार्वजनिक स्थान पर गंदगी नहीं फैलेगी। गंदगी फैलाने की शिकायत मिलने पर पशु स्वामी पर अर्थदंड की कार्रवाई निगम कर सकता है। साथ ही पशु स्वामी किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र जैसे पार्क, गली, सड़कों आदि में कुत्ते को लावारिस नहीं छोड़ सकते हैं। न ही इन स्थानों पर खुले में शौच कराने की अनुमति है। पशु स्वामी की जिम्मेदारी है कि उसके पालतू कुत्ते से पड़ोसी और किसी अन्य व्यक्ति को परेशानी न हो। अगर पालतु कुत्ते को एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगी है और वह किसी व्यक्ति को काट लेता है, संबंधित व्यक्ति थाने या नगर निगम में शिकायत करता है तो पशु स्वामी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

कुत्ते की ऊंचाई के अनुसार लगता है शुल्क

कुत्ता पालने के लिए लोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते है। नगर निगम पालतू कुत्तों का पंजीकरण दो तरह से करता है। अगर कुत्ते की ऊंचाई दो फिट से कम है तो एक हजार रुपये और अगर कुत्ते की ऊंचाई दो फिट से ज्यादा है तो 2500 रुपये का पंजीकरण शुल्क देना होता है। बिना पंजीकरण के कुत्ता पालने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पंजीकरण नहीं कराने वालों से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूल किया जा सकता है।
कई लोगों ने पाले प्रतिबंधत कुत्ते

नगर निगम में केवल 178 पालतू कुत्तों का ही रजिस्ट्रेशन है। पशु अस्पताल और निजी क्लीनिक की मानें तो शहर में तकरीबन 1500 पालतू कुत्ते हैं। सरकारी पशु अस्पताल में रोजाना दो कुत्ते का वैक्सीनेशन हो रहा है। वहीं, शहर में करीब पांच प्राइवेट क्लीनिक हैं जिसमें रोजाना हर क्लीनिक पर 15-20 कुत्ते वैक्सीनेशन के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पालतू कुत्तों की संख्या 1500 के करीब है। करीब दर्जन भर लोगों ने प्रतिबंधित कुत्ते भी पाल रखे हैं।

यह हैं प्रतिबंधित कुत्ते

प्रशासन एवं विकास पशुपालन विभाग की ओर से पूरे उत्तर प्रदेश में 23 नस्ल के कुत्तों को प्रतिबंधित घोषित किया गया है। प्रतिबंधित नस्लों में पिटबुल टैरियर, टोसा इनु, अमेरिकन स्टैफोर्डशायर टैरियर, फिला ब्रासीलीरों, डोगो अर्जेंटीनो, अमेरिकन बुलडॉग, बोअरवेल, कांगल, मध्य एशियाई शेफर्ड डॉग (ओवचाकी), कोकेशियान शेफर्ड डॉग (ओवचाकी), दक्षिण रूसी शेफर्ड कुत्ता (ओवचाकी), टॉर्नजैक, सरप्लानिनैक, जापानी टोसा और अकिता, मास्टिफस (बोरबुल्स), रॉटवीलर, टेरियर्स, रोडेशियन रिजबैक, वुल्फ कुत्ते, कैनारियो, अकबाश कुत्ता, मॉस्को गार्ड कुत्ता, केन कोरो और उस प्रकार का हर कुत्ता जिसे आमतौर पर एक बैन डॉग (बैंडोग) जाना जाता है।
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