मुरादाबाद। बीमित वाहन के दुर्घटनाग्रस्त न होने का बहाना बनाकर बीमा कंपनी बीमे की धनराशि देने से इनकार नहीं कर सकती। इस विषय में गुरुवार को कोर्ट ने एक आदेश पारित किया है। दरअसल मोटरसाइकिल और उसमें चालक का दुर्घटना बीमा कवर होने के बाबजूद बीमा कंपनी ने मृतक की पत्नी के बीमा दावे को मात्र इस आधार पर निरस्त कर दिया कि जिस वाहन का बीमा था उससे बीमा धारक की मृत्यु नहीं हुई और न ही मृतक उस पर सवार था।
स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी के इस आधार पर बीमा दावे को निरस्त करने को गलत मानते हुए मृतक की पत्नी व बच्चों की बीमा धनराशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। शहर के मोहल्ला बसंत विहार निवासी शशि कुमारी के पति पिंकी सिंह एक बाइक के स्वामी थे। उन्होंने नवंबर 2018 में बाइक का बीमा कराया था, जिसमें स्वामी एवं चालक का दुर्घटना बीमा कवर था। इसकी धनराशि 15 लाख रुपये थी।
आठ जनवरी 2019 को पिंकी सिंह की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इसके बाद मृतक की पत्नी व बच्चों ने दुर्घटना में मृत्यु के संबंध में बीमा कंपनी में दावा प्रस्तुत किया। बीमा कंपनी ने यह दावा खारिज कर दिया, क्योंकि मृतक की बीमित बाइक से कोई दुर्घटना नहीं हुई और न ही बाइक दुर्घटनाग्रस्त हुई।
इस पर मृतक की पत्नी व बच्चों ने स्थायी लोक अदालत मुरादाबाद में परिवाद योजित किया। स्थायी लोक अदालत ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के तर्कों से सहमत होकर आदेश दिया कि बीमा कंपनी ने ऐसी कोई नियम व शर्त प्रस्तुत नहीं की है जिससे बीमा कंपनी के कथन पुष्ट होते हों।
बीमा पालिसी में मात्र स्वामी एवं चालक का व्यक्तिगत दुर्घटना लाभ 15 लाख रुपये अंकित है। इस पर स्थायी लोक अदालत की वरिष्ठ सदस्य वंदना सहाय और सदस्य सुषमा रानी ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह मृतक की पत्नी को 15 लाख रुपये और मुकदमा प्रस्तुत करने की तिथि से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करें।