कांठ। सड़क किनारे बिना अनुमति के लगाए जा रहे बिजली के खंबों का कार्य रुकवाते हुए वन विभाग की टीम ने मौके से एक ट्रैक्टर हाईड्रा को कब्जे में ले लिया। इसे लेकर बिजली निगम के जेई और वन विभाग की टीम में बहस भी हुई।
सोमवार को मुरादाबाद-हरिद्वार मार्ग स्थित छजलैट के कोकरपुर की पुलिया और कुचावली के बीच बिजली निगम के ठेकेदार कमल और सुनील बिजली के खंभे लगवा रहे थे। इसका पता लगने पर वन विभाग के डिप्टी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने खंभे लगाए जाने का कार्य रुकवाते हुए ट्रैक्टर हाईड्रा को अपने कब्जे में ले लिया। सूचना पर भीकनपुर बिजली उपकेंद्र के जेई संजय शर्मा भी आ गए। उन्होंने वन टीम ने कार्य रुकवाने की बाबत जानकारी चाही। इसी को लेकर दोनों ओर से बहस भी हुई। इस मामले में डिप्टी वन रेंजर पुष्पेंद्र सिंह का कहना था कि जिस स्थान पर बिजली खंभे लगाए जा रहे थे, वह स्थान संरक्षित वन पटरी है, जिसमें बिना अनुमति के कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता। खंभे लगाने के लिए कोई भी अनुमति नहीं ली गई थी और न ही इस संबंध में बिजली निगम ने पहले कुछ बताया था। वहीं बिजली निगम के जेई संजय शर्मा का कहना था कि जहां खंभे लगाए जा रहे थे, वहां से जा रही बिजली लाइन के तीन खंभे ट्रक की टक्कर लगने से टूट गए थे। जिससे 10-12 घरों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। उन्हीं के स्थान पर दूसरे खंभे लगाए जा रहे थे। ताकि बिजली आपूर्ति सुचारू की जा सके। फिलहाल सोमवार देर शाम तक भी यह मामला हल नहीं हो पाया था।