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Moradabad News: महानगर में बिजली विभाग की स्काडा योजना भी धड़ाम, नहीं दिख रहा काम

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मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बिजली के तारों की तरह स्काडा योजना भी धड़ाम हो गई है। इसका काम कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। योजना के तहत 45 करोड़ रुपये खर्च कर शहर के 10 बिजलीघरों को आपस में जोड़कर 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने का दावा था, जोकि अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
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2022 में इस योजना के लिए विद्युत निगम को बजट मिला था। तब से अब तक पीवीवीएनएल के तीन प्रबंध निदेशक बदल चुके हैं। चार मुख्य अभियंता और चार अधीक्षण अभियंता बदल गए हैं। इसके बावजूद काम अधूरा है। पहले निजी कंपनी ने सर्वे में सब ठीक बताया, लेकिन अब बाधाओं के कारण स्काडा सिस्टम नहीं लग पा रहा है। स्काडा का पूरा नाम सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्यूजीशन है। इसके तहत शहर के 10 बिजलीघरों को ऑप्टीकल फाइबर केबिल व रिंग मेंस यूनिट के जरिये आपस में जोड़ा जाना है। बिजलीघर आपस में जोड़े जाने के बाद इसकी मॉनिटरिंग के लिए अधीक्षण अभियंता के कार्यालय में बने कंट्रोल रूम से निगरानी की जा सकेगी। यदि किसी एक बिजलीघर के क्षेत्र में फाल्ट से बिजली आपूर्ति बाधित होगी तो कंट्रोल को पता चल जाएगा। साथ ही स्काडा के जरिये दूसरे बिजलीघर से स्वत: ही सप्लाई शुरू हो जाएगी। इस तरीके से शहर में 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो सकेगी। इस काम का जिम्मा निजी कंपनी रिलाइंस इलेक्ट्रिक को दिया गया है। अब तक न तो डीएलसी स्क्रीन लगी है और न ही एफपीआई व रिले का काम हो पाया है।

एमडी पीवीवीएनएल जता चुके हैं नाराजगी

कुछ माह पहले मुरादाबाद दौरे पर आए पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने स्काडा कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया था। उन्होंने देरी का कारण अधिकारियों से पूछा और स्थिति जानी थी। साढ़े तीन साल में कार्य न होने पर उन्हें नाराजगी भी जताई थी लेकिन इसके बाद भी तेजी नहीं दिखी। मुख्य अभियंता द्वारा दावा किया गया था कि नवंबर 2025 तक स्काडा सिस्टम को शुरू कर लिया जाएगा। अब दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 आधा बीत गया है। अब तक प्रोजेक्ट अधर में है।
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वर्जन
निजी कंपनी के ठेकेदार की ओर से सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। हमने कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए एमडी कार्यालय में पत्र भेजा है। जब तक काम पूरा नहीं हो जाता, भुगतान नहीं करेंगे। अब मार्च 2026 तक इसे शुरू करने का लक्ष्य है।
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- प्रशांत कुमार, अधीक्षण अभियंता
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