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लीव विदआउट पे बताकर 98 दिन से गैरहाजिर जिपं अध्यक्ष के डॉक्टर पति ने बीमार बताकर कर ली ड्यूटी ज्वाइन

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मुरादाबाद। कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान 16 अप्रैल से जिला अस्पताल की ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहे जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के पति डॉ. ब्रजेश सिंह ने 98 दिन बाद खामोशी के साथ शनिवार से ड्यूटी ज्वाइन कर ली। लंबी छुट्टी की अवधि में खुद को लीव विदआउट पे पर बताने वाले डॉ. ब्रजेश ने अब गैरहाजिरी की अवधि में खुद को बीमार बताया है, लेकिन ज्वाइनिंग के वक्त अपनी बीमारी का कोई प्रमाण स्वास्थ्य महकमे को नहीं सौंपा है। सीएमएस ने भी मेडिकल सार्टिफिकेट के बिना न सिर्फ ज्वाइनिंग को हरी झंडी दे दी बल्कि उस नोटिस का जवाब लेना भी उचित नहीं समझा जो शुक्रवार को डॉ. ब्रजेश को जारी किया था। स्वास्थ्य महानिदेशक का कहना है कि इस मामले में सीएमएस से जवाब तलब किया जाएगा।
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जिला पंचायत की चुनावी सरगर्मी के बीच डा. ब्रजेश की लंबी गैरहाजिरी महकमे के साथ-साथ राजनीतिक हल्कों में भी चर्चा में रही। इस बाबत पूछने पर डॉ. ब्रजेश ने जवाब दिया था कि वह लीव विदआउट पे पर हैं। इसके जवाब में विभागीय अधिकारियों का कहना था कि लीव विदआउट पे की पूर्व जानकारी तैनाती स्थल पर दी जाती है लेकिन मंजूरी शासन से होती है, वो भी ठोस कारण बताने पर। माना जा रहा है कि लीव विदआउट पे की शासन से मंजूरी का पेच फंसता देखकर ही डॉ. ब्रजेश ने अब ज्वाइनिंग करते वक्त बीमारी को खुद की गैरहाजिरी का कारण बताया है।
छुट्टियों से जुड़ी विभागीय शर्तों व नियमों की दुहाई देने वाले जिला अस्पताल के कार्यवाहक सीएमएस डॉ. शिव सिंह ने भी अब डॉ. ब्रजेश की बीमारी का प्रमाणपत्र लिए बिना खामोशी से उन्हें ज्वानिंग का अवसर दे दिया। नियमों के जानकार बताते हैं कि कोई कर्मचारी एक महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है तो स्थानीय अधिकारियों को इसकी जानकारी निदेशालय को देनी होती है। लेकिन डॉ. ब्रजेश के मामले में तीन माह से ज्यादा की गैरहाजिरी हो जाने के बाद भी निदेशालय को सूचना देने की जरूरत नहीं समझी गई। यही नहीं सीएमएस स्तर से शुक्रवार को उनकी गैरहाजिरी पर जारी हुए नोटिस का जवाब मिले बिना ही उनको ज्वाइनिंग का अवसर दे दिया गया।
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स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि इस मामले में सीएमएस से जवाब मांगा जाएगा कि उन्होंने डॉ. ब्रजेश की लंबी गैरहाजिरी की सूचना क्यों नहीं दी।
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शासन के निर्देश पर ही ज्वाइनिंग कराने का है नियम
सीएमओ डॉ. एमसी गर्ग का कहना है कि शासन की ओर से समय-समय पर निर्देश आते हैं कि यदि कोई कर्मचारी एक महीने से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है तो अधिकारियों को इसकी जानकारी निदेशालय को देनी होती है। शासन की अनुमति पर ही ड्यूटी पर ज्वाइनिंग कराई जाती है।
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डॉ. ब्रजेश मीडिया में कह रहे थे कि वह लीव विदआउट पे पर हैं, लेकिन उन्होंने हमें बीमार होने की जानकारी दी है। डॉ. ब्रजेश सिंह ने शनिवार को ज्वाइन कर लिया है। उन्होंने कहा है कि वह बीमार थे और अब वे स्वस्थ हैं। कोई व्यक्ति खुद को स्वस्थ बताकर ज्वाइन कर रहा है तो हम ज्वाइन कराएंगे। हम उन्हें ज्वाइन करने से नहीं रोक सकते हैं। अभी नोटिस का जवाब आना बाकी है। उन्हें अवकाश पर जाने से पहले बताना चाहिए था। यदि वह मेडिकल प्रमाणपत्र देते हैं तो अपर निदेशक वेतन स्वीकृत करने का निर्णय लेंगे। लीव विदआउट पे शासन से स्वीकृत होती है। हमने अभी तक शासन को सूचना नहीं दी है।
- डॉ. शिव सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल
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लंबे समय तक गैरहाजिर रहना सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला है। ऐसे मामलों में विभाग को एक महीने बाद निदेशालय को सूचना देने का नियम है। ज्वाइनिंग से पहले ही गैरहाजिर रहने के कारण का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना जरूरी है। मुझे सीएमएस ने डॉ. ब्रजेश सिंह मामले की कोई जानकारी नहीं दी है।
डॉ. प्रभाकर बंधु, अपर निदेशक, मुरादाबाद
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यदि चिकित्सक बिना बताए गैरहाजिर रहे हैं तो सीएमएस को हमें जानकारी देनी चाहिए थी। उनका वेतन अभी रोका गया है। लीव स्वीकृत नहीं हुई तो उसे ब्रेकिंग सर्विस माना जाएगा। यदि वह बीमार हैं तो स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लगाना चाहिए, ताकि चिकित्सकों के बोर्ड में उसका संज्ञान लिया जा सके। यदि वह मेडिकल लगाते हैं तो अधिकारियों को चिकित्सा बोर्ड को उनकी गतिविधियों की जानकारी भी देनी होगी कि वह इस दौरान चुनाव में सक्रिय रहे हैं या नहीं। लीव विदआउट पे निदेशालय स्वीकृत करता है। सीएमएस मुरादाबाद से इस मामले जवाब मांगा जाएगा, क्योंकि इतने लंबे समय तक किसी कर्मचारी के गैरहाजिर रहने पर उन्हें निदेशालय को जानकारी देनी चाहिए थी। जानकारी न देना उनकी लापरवाही है।
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डॉ. डीएस नेगी, महानिदेशक , स्वास्थ्य विभाग, लखनऊ
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