मुरादाबाद। गन्ना पेराई सत्र 2025-26 पूरा हो चुका है, सभी 23 चीनी मिलें भी बंद हो चुकीं हैं। इन दिनों पेराई सत्र 2026-27 के लिए बसंतकालीन गन्ना बोआई चल रही है। गन्ने का रकबा बढ़ाने के साथ साथ गन्ने की पैदावार भी बढ़े, इसके लिए शुक्रवार को उपायुक्त (गन्ना) की अध्यक्षता में गन्ना अधिकारियों, गन्ना समितियों व चीनी मिलों के प्रधान प्रबंधकों के साथ बैठक की गई। जिसमें गन्ने का रकबा सात प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 2.67 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। चीनी मिलों को निर्देशित किया गया कि वह किसानों को अनुदान पर कृषियंत्रों के साथ साथ बीज, खरपतवारनाशक दवाइयां आदि उपलब्ध कराकर मिल गेट क्षेत्र का रकबा व पैदावार बढ़ाएं।
बसंतकालीन गन्ना बोआई वर्ष 2025-26 के सापेक्ष वर्ष 2026-27 में चीनी मिलों को भी लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। मिल गेट क्षेत्र में कृषि योग्य भूमि, गन्ना आपूर्ति का विवरण तथा बीज की उपलब्धता और गन्ना बुआई की बेहतर रणनीति और प्रबंधन से गन्ने का रकबा व पैदावार बढ़ाने की रणनीति पर गन्ना विभाग व चीनी मिलों ने मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया है। उप गन्ना आयुक्त ने समीक्षा के दौरान बताया कि त्रिवेणी चीनी मिल रानीनांगल व डीएसएम शुगर मिल असमोली ने 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया है, मंडल में सभी 23 मिलों ने औसतन 91 प्रतिशत गन्ना भुगतान कर दिया है, शेष नौ प्रतिशत भुगतान को आगामी दस दिनों में करने का कहा गया है।
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने चीनी मिलों को उनकी पेराई क्षमता के अनुरूप गन्ने की उपलब्धता सुनिश्चित करने व मिल गेट क्षेत्र में बेहतर रणनीति और प्रबंधन से गन्ना अच्छादन बढाने को कहा है। बसंतकालीन गन्ना बोआई का लक्ष्य 2.67 लाख हेक्ट्येर दिया गया है, जो पिछले साल से सात प्रतिशत अधिक है, जो पिछले साल गन्ना था, उसकी पे़ड़ी का क्षेत्र इससे अलग है। मंडलपुर में चांगीपुर की एक नई चीनी मिल संचालित हो रही है, उसके लिए भी गन्ना चाहिए होगा, इसलिए लक्ष्यों की ससमय पूर्ति आवश्यक है।