मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर जनप्रतिनिधियों से सुझाव एवं आपत्तियां ली। आयोग के अध्यक्ष ने सवाल किया कि आरक्षण की वर्तमान स्थिति ठीक है या और चाहिए। इस प्रश्न को लेकर ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों और बीडीसी ने अपने सुझाव दिए।
पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह के साथ सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया एवं एस.पी. सिंह शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनप्रतिनिधियों से राजनीति में प्रतिनिधित्व का फीडबैक लेने के लिए आए। सवाल किया कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण 27 प्रतिशत है, यह ठीक है या और चाहिए। आयोग के सदस्यों के साथ मंच पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह भी मौजूद थीं। इस दौरान ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं ग्राम प्रधानों ने स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी के लिए लागू आरक्षण व्यवस्था के प्रभाव के बारे में जानकारी दी। कुछ लोगों ने क्रीमीलेयर को हटाने की मांग की ताकि उसी जाति के कमजोर लोग भी इसका लाभ उठा सके। बैठक में मौजूद एक महिला बीडीसी ने भी आरक्षण को 32 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की। आयोग ने सदर ब्लॉक में जाकर ग्राम प्रधानों की राय ली। आयोग के अध्यक्ष ने पत्रकारों को बताया कि 15 वह जिलों का दौरा कर चुके हैं। अभी 60 जिलों का दौरा करीब तीन माह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद शासन को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन डीपीआरओ आलोक कुमार शर्मा ने किया। इस दौरान सीडीओ मृणाली अविनाश जोशी, डीडी पंचायत अभय कुमार यादव, एडीएम सिटी अंकुर श्रीवास्तव मौजूद थे।