मुरादाबाद। सर्दी इस बार सिर्फ तापमान नहीं गिरा रही, बल्कि मरीजों के दिल पर दबाव भी बढ़ा रही है। 40 दिन में शहर के अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में हार्ट अटैक के 63 मामले आए हैं। इन मरीजों में 19 को एंजियोप्लास्टी कर स्टंट डालने की जरूरत पड़ी, जबकि दो लोगों की मौत कार्डियक अरेस्ट से हो चुकी है।
सबसे ताजा और मामला 24 वर्षीय युवक का है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव सिंघल बताते हैं कि युवक को खाना खाते वक्त सीने में दर्द हुआ। अचानक चक्कर और पसीना आने लगा। परिवार वाले अस्पताल लेकर पहुंचे तो ईको करने पर पता चला कि उसे हार्ट अटैक आया था। फास्ट फूड ज्यादा खाने से उसके दिल के वाल्व पर कैल्शियम की परत चढ़ गई थी। सही समय पर अस्पताल लाने से जान पर जोखिम नहीं बना। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भी रोजाना एक हार्ट अटैक का मरीज पहुंच रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस मरीज को एंजियोप्लास्टी की जरूरत होती है, उसे रेफर कर दिया जाता है। बाकी मरीजों को एंटीप्लेटलेट थैरेपी और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने वाली दवाइयां दी जाती हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि सर्दियों में शरीर की रक्षा प्रणाली दिल पर अतिरिक्त बोझ डालती है। ठंड बढ़ते ही रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ता है। इसके साथ ही ठंड में खून गाढ़ा हो जाता है, थक्का जमने का खतरा बढ़ता है। कोलेस्ट्रॉल लेवल सर्दियों में ऊपर जाता है। सुबह-सुबह ठंड में टहलना या जिम में ज्यादा मेहनत हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। कम पानी पीना और तला-भुना खाना भी जोखिम को बढ़ाता है।
अस्पतालों की इमरजेंसी में पहुंचे इस तरह के केस
सिद्ध अस्पताल के चीफ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग मेहरोत्रा बताते हैं कि बताते हैं कि हाल के दिनों में कई मरीज ऐसे आए जिनमें पहले कोई हृदय रोग नहीं था। 35 वर्षीय आईटी इंजीनियर देर रात तक काम करने, कम नींद लेने और सुबह ठंड में तेज वॉक करने के बाद सीने में दर्द बताते हुए अस्पताल पहुंचे। एंजियोग्राफी में 90 प्रतिशत ब्लॉकेज था, उन्हें तुरंत स्टंट डालना पड़ा।
- विवेकानंद अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गीतेश मानिक बताते हैं कि 42 वर्षीय सेना के अधिकारी खराब खानपान के कारण हार्ट अटैक झेल चुके हैं, उनके स्टंट डालना पड़ा।
- केडीआरसी की कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनुपमा बंसल का कहना है कि 40 वर्षीय दुकानदार को ठंड में दुकान खोलते वक्त अचानक पसीना और बेचैनी महसूस हुई। ईसीजी में हार्ट अटैक की पुष्टि हुई, उनका इलाज चल रहा है।
प्रशिक्षण लेने के बाद भी वेंटिलेटर नहीं चला पा रहे जिला अस्पताल के डॉक्टर
जिला अस्पताल के एक डॉक्टर और तीन पैरामेडिकल स्टाफ का हाल ही में लखनऊ में आईसीयू संचालन की ट्रेनिंग दी गई। इसके बावजूद अस्पताल में रखे वेंटिलेंटर मरीजों के काम नहीं आ रहे। मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। आईसीयू संचालन के लिए 24 घंटे प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। सिर्फ एक डॉक्टर की ट्रेनिंग से काम नहीं चलेगा। साथ ही एनेस्थेटिस्क की जरूरत होगी। फिलहाल अस्पताल में केवल एक एनेस्थेटिस्ट डॉ. प्रदीप शर्मा तैनात हैं।
डॉक्टरों के वर्जन (फोटो)
अस्पताल की आईपीडी में हर दिन तीन-चार मामले हार्ट अटैक के आ रहे हैं। हार्ट फेल्योर के मामले भी हैं। इन मामलों के पीछे सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली भी बड़ी वजह है। तनाव, फास्ट फूड, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और नींद की अनियमितता युवाओं के दिल को समय से पहले कमजोर कर रही है।
- डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, कार्डियोलॉजिस्ट
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज के मरीज, मोटापा या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग हार्ट फेल्योर और हार्ट अटैक से पीड़ित हो रहे हैं। हर दिन ऐसे तीन-चार मरीज आ रहे हैं। यदि बीपी की दवा खाते हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के न छोड़ें। सीने में भारीपन, दर्द महसूस करें तो फौरन डॉक्टर के पास पहुंचें।
- डॉ. अनुपमा बंसल, कार्डियोलॉजिस्ट
रात में दो बजे से सुबह पंच बजे के बीच हर दिन औसतन दो मरीज हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर के आ रहे हैं। रात के इस समय में शरीर में सरकार्डियन रिदम होता है। इससे खून में चिपचिपाहट बढ़ती है। जिनके परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास हो उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
- डॉ. संजीव सिंघल, कार्डियोलॉजिस्ट