मुरादाबाद। वित्तीय वर्ष 2021-22 में मनरेगा के तहत हुए भुगतान में ऑडिट का पेंच फंस गया है। ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि ऑडिटर ने जिले की करीब पांच सौ ग्राम पंचायतों में हुए इस भुगतान को गलत मान लिया है, जबकि उस समय ऑडिट करवाने की कोई व्यवस्था भी नहीं थी। अब पुन: ऑडिट करवाने का समय मांग रहे हैं तो ऑडिटर समय नहीं दे रहे हैं। शनिवार को ग्राम विकास अधिकारी-ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति की बैठक विकास खंड मुरादाबाद के सभागार में हुई। ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद सागर ने कहा कि मुरादाबाद में वर्ष 2009 से मनरेगा योजना शुरू हुई। वर्ष 2013 तक मनरेगा मजदूरों के भुगतान की धनराशि प्रधान के बैंक खाते में आती थी। इसके बाद शासन ने स्वरूप बदल दिया। सरकार सीधे मजदूरों के अकाउंट में मजदूरी की धनराशि भेजने लगी। इसका 2013 से 2020 तक कोई ऑडिट नहीं हुआ। इसी बीच वित्तीय वर्ष 2021-22 में ऑडिटर ने मनरेगा मजदूरी की धनराशि का ऑडिट करवाने का कहा, लेकिन इसके लिए कोई लिखित प्रक्रिया नहीं अपनाई। ऐसे में ऑडिटर ने जिले की करीब पांच सौ ग्राम पंचायतों में हुए भुगतान को गलत भुगतान बता दिया। इन ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत एक लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक के कार्य करवाए गए थे। इसमें तालाब बनाने के अलावा गौशाला निर्माण आदि शामिल है।
ग्राम प्रधान व सचिव को कर रहे परेशान पदाधिकारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 ये 2021-22 के दौरान जो स्पेशल ऑडिट हुए हैं, उनमें परिपालन जमा करने के बाद भी स्पेशल ऑडिट नहीं काट रहे हैं और बार-बार असंतोषजनक कहकर वापस कर देते हैं। जो धनराशि शासनादेश के अनुसार कंटीजेंसी की एडीओ पंचायत को गई है उस तक में आपत्ति है। छोटी-छोटी कमी निकालकर प्रधान और सचिव को परेशान किया जा रहा है। परिपालन कमेटी अगर संतोषजनक कर देते है तो अधिकारी उसे असंतोषजनक कर देते हैं। इस दौरान महेंद्र सिंह, चंद्र प्रकाश, सुशील यादव, सूरज नायक, मोहम्मद कौसर, सुरेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, सतपाल सिंह, मोहम्मद जकी अनवर, आमोद चौहान आदि।
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यह शासन स्तर पर मामला चल रहा है। वहां से जो भी निर्णय होगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
राजनाथ प्रसाद भगत, उपायुक्त मनरेगा