मुरादाबाद। राजकीय केजीके होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में बाहरी युवकों के साथ सीनियर छात्र को पीटने के मामले में बृहस्पतिवार को आरोपी छात्र को कक्षाओं से तीन माह के लिए निष्कासित कर दिया है। मामले में जांच समिति की सिफारिश के अनुसार कार्रवाई न होने से सीनियर छात्रों में रोष है। प्राचार्य का कहना है कि छात्रहित में यह फैसला लिया गया है।
कॉलेज में पांच जुलाई को छात्र बैडमिंटन खेल रहे थे। इसी दौरान जूनियर छात्र यशवर्धन पाठक अपने बाहरी तीन-चार युवकों के साथ वहां आ गया। इस पर सीनियर छात्र प्रवीण कुमार ने यशवर्धन से पूछ किया कि वह कॉलेज का छात्र है तो उसके साथ बाहरी लड़के क्यों है, क्योंकि परिसर में छात्राएं भी हैं और उनकी सुरक्षा की वजह से बाहरी युवकों को नहीं आना चाहिए। उस वक्त यशवर्धन चुप रह गया, लेकिन दूसरे दिन छह जुलाई को यशवर्धन ने कार्यालय में प्रवीण द्वारा रैगिंग किए जाने की शिकायत की। इसके बाद शाम को उन्हीं बाहरी युवकों के साथ छात्रावास गेट के बाहर पहुंच गया। जब सीनियर छात्र प्रवीण बाइक से वहां पहुंचा तो यशवर्धन और उसके साथ आए युवकों ने प्रवीण को रोक लिया और मारपीट की। शोर सुनकर घटनास्थल पर कॉलेज की ही एक महिला शिक्षिका पहुंच गईं और उन्होंने बीच-बचाव करने का प्रयास किया। इस पर आरोपियों ने उनके साथ भी बतमीजी की। इस घटना में प्राचार्य डॉ. डीएस कुशवाह ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। इसमें डॉ. मुकेश गौतम, डॉ. कृष्णवीर सिंह, डॉ. श्वेता सिंह शामिल रहे। समिति ने मामले की जांच की और रैगिंग होने की घटना गलत पाई गई। इसके बाद समिति ने आरोपी यशवर्धन पाठक को कक्षाओं से छह माह के लिए निष्कासित करने की सिफारिश की। इस पर बुधवार को प्राचार्य डॉ. डीएस कुशवाह ने आरोपी छात्र को तीन माह के लिए कक्षाओं से निष्कासित कर दिया। जब इसकी जानकारी सीनियर छात्रों को हुई तो वह आक्रोशित हो गए। उनका कहना है कि प्राचार्य को जांच समिति की सिफारिश के अनुरूप आरोपी छात्र को छह माह के लिए निष्कासित करना चाहिए।
वर्जन...
जब जांच समिति ने आरोपी छात्र को छह महीने के निष्कासन की सिफारिश की थी तो प्राचार्य द्वारा तीन माह के लिए क्यों निष्कासित किया गया। हम प्राचार्य द्वारा लिए गए फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। अपने सीनियर छात्रों के साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
कफील, छात्र
प्राचार्य व अन्य के कहने पर हमने यशवर्धन पाठक के खिलाफ की गई एफआईआर को वापस लिया था। उन्होंने हमें शुरुआत से आश्वासन दिया था कि आरोपी को छह महीने के लिए निष्कासित किया जाएगा, लेकिन अब आरोपी को तीन महीने के लिए निष्कासित किया गया है। जब हमने इसका कारण जानने का प्रयास किया तो उन्होंने इसे स्वविवेक बताया। प्राचार्य के इस निर्णय से हम संतुष्ट नहीं हैं। हमारे साथ अन्यास हुआ है। इसलिए शुक्रवार को कॉलेज प्रशासन से मुलाकात कर दोबारा जांच समिति के फैसले को ही लागू करवाने की मांग की जाएगी। यदि मांग नहीं मानी गई तो जिला प्रशासन से शिकायत करेंगे।
प्रवीण कुमार, पीड़ित छात्र
मैंने छात्रों को एफआईआर वापस लेने के लिए नहीं कहा था, बल्कि छात्रों ने ही छात्रहित में उसे वापस लिया है। विशेष परिस्थितियों और छात्र के भविष्य को देखते हुए उसे तीन महीने तक निष्कासित करने का निर्णय लिया है। एक सप्ताह के भीतर यशवर्धन के माता-पिता को भी बुलाया है, ताकि वह शपथपत्र दें कि यदि ऐसी घटना यशवर्धन पाठक ने दोबारा की तो उसे महाविद्यालय से निष्कासित कर दिया जाएगा।
डॉ. डीएस कुशवाह, प्राचार्य, राजकीय केजीके होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल