मुरादाबाद। धीमरी जमीन प्रकरण का मामला भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचने के बाद जिले के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। जिला प्रशासन ने तीन दिनों तक जमीन की पैमाइश करने के बाद रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है। इधर मेयर का कहना है कि उनके पास जमीन के कागजात पक्के हैं। सभी लोगों को जवाब दिया जाएगा।
जमीन प्रकरण को लेकर मेयर और जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच चार तीनों से तनातनी बरकरार है। यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब एसडीएम सदर ने 12 मार्च को हाईवे से सटे धीमरी की जमीन पर कब्जा लेने के दौरान बुलडोजर चलवाकर चहारदीवारी को ध्वस्त करा दिया। जिला प्रशासन का कहना था कि यह जमीन मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय के नाम पर आवंटित है। इसके बाद मेयर ने बताया कि सदर तहसील की टीम ने उनकी बाउंड्रीवाल को बगैर सूचना दिए ध्वस्त कर दिया। इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत करने पर राजस्व और चकबंदी की टीमों ने धीमरी में जरीब, फीता और रोवर सिस्टम से तीन दिनों तक जमीन की पैमाइश की। पैमाइश के दौरान टीमों ने मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय के लिए आवंटित पांंच एकड़ जमीन को चिन्हित किया है। अभी मेयर की जमीन का सीमांकन नहीं किया गया है। इधर मेयर विनोद अग्रवाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर बताया कि वह जमीन पर 15 वर्षों से काबिज हैं। जमीन का खारिज दाखिल होने के बाद उनका नाम अंकित है। फिर भी तहसील सदर के एसडीएम ने बगैर नोटिस दिए जमीन पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की। इस दौरान 55 मीटर बाउंड्रीवाल ध्वस्त कर 75 लाख का नुकसान किया गया। यह कार्रवाई कोर्ट के दिए गए निर्देशों का भी उल्लंघन है। इस मामले में उन्होंने किसी अन्य जिले के एसडीएम द्वारा पैमाइश कराने की गुहार लगाई है। उनको जिले के राजस्व अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। बताया कि आगामी चुनाव में किस प्रकार से कार्यकर्ताओं के बीच जाएंगे। पता चला है कि प्रदेश अध्यक्ष ने इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की है। इस मामले में डीएम अनुज सिंह और एसडीएम ने जमीन मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है। वहीं मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि समय आने पर सभी को कागज से जवाब दिया जाएगा। अभी वह दिल्ली स्थित एक कार्यक्रम मेें भाग लेने के लिए आए हैं।