मुरादाबाद। महानगर में दस कॉलोनियां ऐसी हैं जिनके ऊपर से हाईटेंशन की लाइन गुजर रही है। अपने मकान की छत पर लोग नहीं जा पाते। अगर हाथ उठा दें तो तार छू जाए। बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी खराब हो जाती है। हमेशा करंट आने का डर बना रहता है। यह लोग वर्षों से लाइन को शिफ्ट कराने की मांग कर रहे हैं मगर अभी तक हासिल कुछ नहीं हुआ। बिजली विभाग का कहना है कि लाइनें पहले से थीं और बाद में उनके नीचे कॉलोनियां बस गईं। वहीं स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब खेतों की जगह प्लॉट काटे जा रहे थे, रजिस्ट्री हो रही थी और मकान बन रहे थे, तब सरकारी विभागों ने क्यों नहीं रोका।
चंद्रनगर
घर के अंदर खंभा, सिर के ऊपर तार
चंद्रनगर की गलियों में कई मकान ऐसे हैं जिनके आंगन और कमरों के बीच बिजली के खंभे खड़े हैं। छत पर कपड़े सुखाने या पानी की टंकी तक जाने में भी लोग डरते हैं। बच्चों को अकेले छत पर जाने नहीं दिया जाता। तेज हवा या बारिश शुरू होते ही परिवारों की धड़कनें बढ़ जाती हैं।
शिव विहार
छत पर जाना भी जोखिम
शिव विहार में कई मकानों की छतों से कुछ ही फीट ऊपर हाईटेंशन लाइनें गुजर रही हैं। लोग बताते हैं कि घर की मरम्मत, पुताई या छत पर कोई काम करना जान जोखिम में डालने जैसा है। कई बार बिजली के तारों से चिंगारी निकलने की घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
खुशहालपुर
स्कूल के ऊपर तार, हर बारिश में बढ़ जाती है दहशत
खुशहालपुर में हाईटेंशन लाइन के नीचे बड़ी आबादी रहती है। यहां एक सरकारी स्कूल भी बिजली के तारों के नीचे है। बरसात और आंधी के दौरान लोग घरों से बाहर निकलने से भी डरते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं तार टूटकर सड़क या मकान पर न गिर जाए। स्थानीय लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान आज तक नहीं मिला।
पीतलबस्ती
बाजार और बस्ती दोनों खतरे में
पीतलबस्ती में रिहायशी मकानों के साथ दुकानें भी हाईटेंशन लाइन के नीचे हैं। दिनभर लोगों की आवाजाही रहती है। दुकानदारों का कहना है कि ऊपर से गुजरते तार हर समय हादसे का डर पैदा करते हैं। किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा, ऐसी आशंका लोगों को सताती रहती है।
इन कॉलोनियों में भी खतरा बरकरार
शहर की एकता कॉलोनी, दुर्गा नगर, बंगला गांव, बुद्धि विहार के पास, दौलतबाग और रामेश्वर कॉलोनी की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई जगह बिजली के खंभे मकानों के बीच फंस चुके हैं और तार आबादी के बेहद करीब से गुजर रहे हैं। बगला गांव निवासी दिलीप शर्मा, विवेक सिंह, कोमल शर्मा, दीपक प्रजापति आदि का कहना है कि उन्होंने तहसील दिवस, जनसुनवाई पोर्टल और बिजली निगम के अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।
वर्जन
जिन स्थानों पर 11 केवी की लाइन हैं और उन्हें शिफ्ट किया जा सकता है, वहां लोगों को एस्टीमेट बनाकर दिया जाता है। इसके अलावा कई कॉलोनियां ऐसी हैं जिनके ऊपर से ट्रांसमिशन की लाइनें गुजर रही हैं, जिन्हें शिफ्ट करना संभव नहीं है। कई स्थानों पर लोगों ने बाद में मकान बनाए हैं, बिजली की लाइनें पहले से हैं।
- प्रशांत कुमार, अधीक्षण अभियंता