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UP:  पारा पहुंचा 7.8 डिग्री, अब भी मुरादाबाद की सड़कों पर रात में ठिठुर रहे लोग... अधिकारी बने हैं बेपरवाह

Thu, 08 Jan 2026 12:06 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

मुख्यमंत्री के खुले में न सोने देने के निर्देशों के बावजूद मुरादाबाद में बेघर लोग ठंड में सड़कों पर सोने को मजबूर हैं। अमर उजाला की पड़ताल में इंपीरियल तिराहा, पारकर रोड और बुध बाजार समेत कई जगहों पर लोग खुले में सोते मिले। 
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मुरादाबाद में खुले में सोते मिले लोग - फोटो : संवाद
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विस्तार
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मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में जिला प्रशासन और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए।  इसके बावजूद मुरादाबाद में अफसर बेपरवाह हैं। बुधवार की देर रात 7.8 डिग्री पारे के बीच अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो बेघर लोग इंपीरियल तिराहे, पारकर रोड, बुध बाजार समेत कई स्थानों पर सड़कों के किनारे सोते मिले। 

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लोगों ने बताई परेशानी - फोटो : संवाद
हापुड़ निवासी राजा पुराने इंपीरियल सिनेमा के सामने सड़क के किनारे एक दुकान के बाहर फर्श पर सो रहे थे। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह से वह मुरादाबाद में काम ढूंढ रहे हैं। रात में कंबल बिछाकर सड़क किनारे फर्श पर सो जाते हैं। हापुड़ में अपने घर से कोई आईडी लेकर नहीं निकले थे इसलिए रैन बसेरे में प्रवेश नहीं मिलता।

लोगों ने बताई परेशानी - फोटो : संवाद
जहां फर्श पर राजा सोते नजर आए, वहां से महज 200 मीटर की दूरी पर नगर निगम का स्थायी रैन बसेरा है। उन्होंने बताया कि सप्ताह भर पहले वहां गए थे लेकिन आधार कार्ड न होने के कारण आश्रय नहीं मिला।

मुरादाबाद में खुले में सोते मिले लोग - फोटो : संवाद
किसी के पास आधार नहीं है तो कोई सिर्फ इसलिए रैन बसेरे में नहीं गया कि लोगों से सुना है वहां बिना रुपये के नहीं रुकने देते। बुध बाजार में हरपाल, नन्हें आदि रिक्शा चालक बताते हैं कि अगर रैन बसेरे में सोएंगे तो रिक्शा कोई ले जाएगा।

मुरादाबाद में बना रैन बसेरा - फोटो : संवाद
जरूरतमंद सड़कों पर, रैन बसेरों में खाली पड़े रहे बेड
मुरादाबाद डिपो, पीतलनगरी डिपो पर बने अस्थायी और रेलवे स्टेशन के पास बने स्थायी रैन बसेरे में महिला कक्ष खाली मिले। तीनों स्थानों पर मिलाकर 30 से ज्यादा बेड खाली नजर आए। रैन बसेरों के केयर टेकर का कहना था कि यह बेड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि जरूरतमंद लोग सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर हैं। नगर निगम का दावा है कि शहर में 10 से अधिक स्थानों पर रैन बसेरों की व्यवस्था है और 56 स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं।

मुरादाबाद में कोहरे का कहर जारी - फोटो : अमर उजाला
मैं बिलारी में रहता हूं। मुरादाबाद शहर में काम ढूंढने आया हूं लेकिन मिला नहीं। कल अपने घर लौट जाऊंगा। मुझे रैन बसेरे के बारे में जानकारी नहीं है। बुध बाजार में सड़क किनारे जगह मिल गई तो यहीं सो गया। - रन सिंह, बिलारी

मुझे बलरामपुर जाना है। 20 दिन पहले लखनऊ से चला था, तब से भटक रहा हूं। गलत बस में बैठ गया था। अब पूछता हूं तो कोई हरदोई बताता है तो कोई राजस्थान। रैन बसेरे के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। - बब्बू सिंह, बलरामपुर

मुरादाबाद में खुले में सोते मिले लोग - फोटो : संवाद
हम रिक्शा चलाते हैं। दिन में ई-रिक्शा ज्यादा होने के कारण काम नहीं मिलता। रात में कुछ सवारियां मिल जाती हैं। ढाई बजे के बाद यहीं इंपीरियल के पास रिक्शा पर ही सो जाते हैं। रैन बसेरे में जाएंगे तो रिक्शा कौन देखेगा। - हरपाल, मुरादाबाद
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मुरादाबाद में खुले में सोते मिले लोग - फोटो : संवाद
मैं पाकबड़ा में रहता हूं। रात दो बजे के बाद दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़नी है। रेलवे स्टेशन पर पुलिस वालों ने सोने नहीं दिया इसलिए सड़क किनारे सो रहा हूं। मेरे पास आधार कार्ड नहीं है, रैन बसेरे में जाने से क्या फायदा। - मो. जावेद, पाकबड़ा

दिन में स्क्रैप इकट्ठा कर बेचने का काम करता हूं। रात में स्टेशन रोड पर दुकान के बाहर तिरपाल बिछाकर सो जाता हूं। मेरे पास कोई आईडी कार्ड नहीं है। लोग बताते हैं कि रैन बसेरे में पैसे लगते हैं इसलिए मैं वहां नहीं गया। - दिशांत, मुरादाबाद
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