महामंत्री एवं प्रदेश सहसंयोजक डॉ. सुनीत गिरी ने कहा कि प्रदेश के सभी शिक्षक और कर्मचारियों के लिए उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन आवश्यक है। शिक्षकों को सुरक्षा प्रदान करने वाली धारा 21 आवश्यक रूप से पुनर्स्थापित होनी चाहिए। शिक्षकों की मांग के बावजूद शासन ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। संयुक्त मोर्चा में प्रदेश के 10 शिक्षक संगठन और तीन प्रधानाचार्य परिषद शामिल हैं। पुरानी पेंशन बहाली, धारा 21 और धारा 18 को पुनर्स्थापित करने की मांग की। उन्होंने मानदेय व आउटसोर्सिंग नियुक्तियों व जन शिक्षा व्यवस्था के निजीकरण पर रोक लगाकर सभी माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण करने की मांग की। इस दौरान जिला मंत्री एवं जिला सहसंयोजक पुष्पेश मिश्रा, मंडलीय संयोजक अनिल कुमार, प्रदेश मंत्री अनिल चौहान, जिला संयोजक सलिल मोहन, प्रधानाचार्य परिषद की प्रदेशीय उपाध्यक्ष डॉ मधुबाला त्यागी राजीव कुमार शर्मा, शशि आर्य, वंदना सक्सेना, आफताब आलम, राकेश वर्मा, डाॅ. सुरेंद्र वर्मा, फैसल मसरुर आदि मौजूद रहे।
- पुरानी पेंशन के विषय में नई पेंशन के लिए सभी नेता कहते हैं। यदि नई पेंशन इतनी ही अच्छी है तो नेता इसे खुद के लिए स्वीकार क्यों नहीं करते हैं। इसके लिए मतदान करवा लिया जाए। नई पेंशन बाध्यता न होकर स्वैच्छिक होनी चाहिए। यह हमारा हक है, इसे हम लेकर ही रहेंगे। -
पुष्पेश मिश्र,
जिला मंत्री, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ सेवारत
- पुरानी पेंशन सभी को मिलनी चाहिए। यह पेंशन ही नहीं, बुढ़ापे का सहारा है। सेवानिवृत्ति के बाद हर किसी को अपनी भोजन व्यवस्था के अलावा दवाईयों के लिए भी आश्रित होना पड़ता है। इसके लिए पेंशन ही एकमात्र सहारा है।
-डॉ. मधुबाला त्यागी, प्रदेशीय उपाध्यक्ष, प्रधानाचार्य परिषद
- पुरानी पेंशन हर शिक्षक का अधिकार है, क्योंकि उनके जीवन का अधिकांश भाग शिक्षा के योगदान में जाता है। एनपीएस के नाम पर शिक्षकों के साथ छल किया जा रहा है। जिससे शिक्षक अपनी वृद्धावस्था में भरण पोषण तो दूर, दो वक्त की चाय की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे। -अनिल कुमार,
मंडल अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ सेवारत
- पेंशन मामले में मतदान करवा लिया जाए। यदि किसी को नई पेंशन चाहिए, उसे नई पेंशन दे दी जाए और जिसे पुरानी पेंशन चाहिए। नई पेंशन में कई ऐसे केस सामने आए हैं, जिसमें सिर्फ एक हजार रुपये पेंशन आई है। इसमें आज के समय पूरे महीने की सब्जी नहीं ले सकते, बाकी क्या हो पाएगा। -सलिल मोहन,
जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ सेवारत