साथ ही रेटिना भी बुरी तरह प्रभावित है। आंख की नसों में खून का दौरा नहीं हो पा रहा है। पहले इसे ठीक करना होगा। इसके बाद आंख की रोशनी लाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। डॉक्टरों ने यहां तक कहा कि नस ठीक नहीं हुई तो रोशनी आना मुश्किल है। इस मामले की शिकायत पुलिस से भी की गई है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
मुरादाबाद के डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ
छात्रा की मां ने बताया कि पिछले 20 दिन में वह जिला अस्पताल के अलावा शहर के कई बड़े नेत्र चिकित्सकों को दिखा चुकी हैं लेकिन सभी डॉक्टरों ने बच्ची को इलाज के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह दी। छात्रा के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण दिल्ली में इलाज के लिए उनके पास रुपये नहीं हैं, इसलिए उन्होंने डीएम से शिकायत कर मदद मांगी। अब एम्स में भी डॉक्टरों का जवाब सुनकर बच्ची के परिजन परेशान हैं। वहीं इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बच्ची की आंख की नसों में चोट का अंदेशा है। डीएम के निर्देश पर इलाज के लिए उसे दिल्ली एम्स भिजवा दिया गया है। परिजनों से कहा है कि किसी भी चिकित्सकीय सहायता के लिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं। - डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ
मामले की जानकारी मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी को जांच सौंपी गई है। वह दो बार विद्यालय जाकर जांच कर चुके हैं। अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।-विमलेश कुमार, बीएसए
स्कूल में विद्यार्थियों को पीटने का कोई नियम नहीं है। न ही मैंने छात्रा की पिटाई की है। आरोप पूरी तरह निराधार हैं। छात्रा की मां ने विद्यालय आकर छात्रा की आंख की रोशनी जाने की बात कहकर प्रमाणपत्र बनाने को कहा था। मैंने अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात कहते हुए प्रमाणपत्र बनाने से इन्कार किया तो उन्होंने मेरे साथ अभद्रता की। साथ ही डीएम से शिकायत करने की धमकी देकर चली गईं।
- गीता कराल, प्रधानाध्यापिका, प्राथमिक विद्यालय भोगपुर मिठौनी