मुरादाबाद। कच्चे माल की महंगाई, चांदी समेत अन्य धातुओं की कीमतों में आए दिन के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी टैरिफ की मार से शंकाओं और आशंकाओं के बीच हिचकोले खा रहे पीतलनगरी के हस्तशिल्प कारोबार को अब नई ऊंचाई की उम्मीद जगी है। अमेरिका-भारत के बीच व्यापार समझौते के समय ट्रंप की नरमी सामने आई। इस बीच भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में 18 प्रतिशत टैरिफ पर सहमति से निर्यात कारोबार की रफ्तार बढ़ना तय है।
निर्यातकों का मानना है कि 50 फीसदी टैरिफ का दबाव घटते ही अमेरिकी बाजार में मुरादाबादी शिल्प पर महंगाई घटेगी, वहां खरीद बढ़ते ही आर्डर से लेकर डिलीवरी तक का क्रम तेज होगा। इसका लाभ निर्यातकों को ही नहीं, कारखानेदारों और दस्तकारों तक को मिलेगा। दस्तकार और कारीगर ही मुरादाबाद के कारोबार की बुनियाद हैं। पिछले कुछ माह से अमेरिकी रुख के कारण फैक्टरियों से लेकर कुटीर उद्योग की तरह घर-घर फैले शिल्प के काम को बड़ा झटका लगा था। पहले 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ और फिर इसके बढ़कर 75 फीसदी होने के दबाव ने अमेरिका से जुड़े आर्डर और माल की सप्लाई रोक दी थी। अमेरिका में और महंगाई के डर से कारोबारियों ने आर्डर होल्ड कर दिए थे।
मुरादाबादी उत्पादों के निर्यात में 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी अमेरिकी बाजार की होने के कारण इसका सीधा असर पीतलनगरी की पूरी कारोबारी धारा पर पड़ रहा था। काम घटता देख तमाम निर्यात फर्मों ने सप्ताह में दो दिन छुट्टी शुरू कर दी थी। कई कारोबारियों ने फैक्टरी में काम करने वालों की संख्या घटा दी थी। अब 18 प्रतिशत टैरिफ की बात सामने आने पर निर्यातकों का कहना है कि निराशा से शुरू हुआ यह साल (2026) अब सुधर जाएगा। इस बदलाव का सकारात्मक असर 14 फरवरी से ग्रेटर नोएडा मार्ट में शुरू हो रहे निर्यात मेले में भी नजर आने की उम्मीद लगाई जा रही है।
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निर्यातक बोले:
मुरादाबाद के निर्यात सेक्टर के लिए राहत भरी खबर है। अमेरिकी टैरिफ का बड़ा दबाव काम पर खराब असर डाल रहा था। अब अमेरिकी बाजार के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है। इसका लाभ शहर के निर्यातकों से लेकर आर्टीजन तक को मिलेगा। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट (आईईएमएल) में फरवरी से शुरू होने वाली एक्सपो की सालभर की श्रृंखला के हर शो में विदेशियों के अच्छे रेसपोंस की उम्मीद है। - सुधीर त्यागी, डायरेक्टर आईईएमएल एवं पूर्व वाइस चेयरमैन हैंडीक्राफ्ट बोर्ड
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अमेरिकी टैरिफ 18 प्रतिशत होने का सीधा मतलब है कि अब मुरादाबाद का काम चल पड़ेगा। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अमेरिका का रुख और मुलायम होगा। इससे टैरिफ और नीचे आ सकता है। सालभर में हस्तशिल्प कारोबार पर सकारात्मक इंपैक्ट की पूरी उम्मीद है। ज्यादा टैरिफ की मार से जूझते समय मुरादाबाद के निर्यातकों द्वारा गैर अमेरिकी देशों में किए गए कारोबारी प्रयास भी काम बढ़ाने में मददगार होंगे। - अजय गुप्ता, चेयरमैन, सीएल गुप्ता एक्सपोर्ट्स
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अन्य मुल्कों को देखें तो अब इंडिया पर सबसे कम टैरिफ है। यह मुरादाबाद के कारोबार के लिए शुभ संकेत है। मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कारोबारी स्पर्धा के दौर में इस बदलाव से अपने देश के कारोबारियों को बहुत लाभ मिलेगा। मुरादाबाद के निर्यात उत्पादों पर मेहनत करने वाले श्रमिक वर्ग में खुशहाली बढ़ेगी। कुछ माह से उनमें बड़ी निराशा थी, जबकि वह हमारे शहर और हमारी कला की रीढ़ हैं। - सतीश धीर, पार्टनर हाईलैंड एक्सपोर्ट्स
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अमेरिकी टैरिफ में कमी मुरादाबाद के हर वर्ग को खुशी देने वाली जानकारी है। हमारे शहर के काम का 50 फीसदी अमेरिकी बाजार पर ही निर्भर है। वहां अब लोगों की खरीद क्षमता बढ़ेगी। इससे हमारे शहर के उत्पादों की मांग बढ़ेगी और मुरादाबाद में काम का पहिया तेजी से घूमेगा। 18 प्रतिशत टैरिफ के फायदे कुछ महीनों में ही नजर आने लगेंगे, यह मेरा मानना है। - मोहम्मद अजीम, एमडी, विस्बा गिफ्ट वेयर एक्सपोर्ट्स
अमेरिका निर्यात उत्पादों के लिहाज से प्रमुख बाजार है। वहां से टैरिफ में कटौती से मुरादाबाद जैसे औद्योगिक शहर के लिए बड़ी मजबूती मिलेगी। टैरिफ में राहत से निर्यातकों की कुल लागत में छह से 10 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में चीन, वियतनाम और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के प्रोडेक्ट के मुकाबले ज्यादा किफायती साबित होंगे और मुरादाबाद से आर्डर की बुकिंग बढ़ेगी। - पीयूष लोहिया, डायरेक्टर, लोहिया वर्ल्ड स्पेस
निर्यात मेलों में भी नजर आएगा अमेरिकी टैरिफ में रियायत का असर
- ईपीसीएच ने तेज की मार्ट में 14 से शुरू हो रहे शो की तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
मुरादाबाद। निर्यातकों की तरह ईपीसीएच टीम का उत्साह भी अमेरिकी टैरिफ के बदलाव ने बढ़ा दिया है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट (आईईएमएल) में 14 फरवरी से शुरू हो रहे निर्यात मेले की तैयारियों में तेजी आ गई है। अमेरिका समेत प्रमुख देशों के बड़े खरीदारों व स्टोर संचालकों की मौजूदगी की आस के साथ मेले की व्यवस्थाएं निर्धारित की जा रही हैं। निर्यातक भी इस प्लेटफॉर्म को भुनाने की कोशिश में लग गए हैं।
ईपीसीएच के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने अमेरिकी टैरिफ की बड़ी मार से राहत को भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है। उनका कहना है कि टैरिफ दर 18 प्रतिशत होने के साथ-साथ इंडिया-यूएस आर्थिक पार्टनरशिप से भी भारतीय कारोबार को काफी फायदा मिलेगा। विशेषकर हस्तशिल्प और टैक्सटाइल सेक्टर के लिए। उम्मीद है कि ईपीसीएच की ओर से आने वाले दिनों में आयोजित हो रहे आईएचजीएफ दिल्ली फेयर में बड़े यूएस ब्रांड और खरीदारों की मौजूदगी सुनिश्चित होगी। मुरादाबाद के निर्यातकों का काम ही नहीं जोश भी बढ़ेगा। अब ईपीसीएच टीम नई परिस्थितियों के हिसाब से निर्यात मेलों की रणनीति तय करेगी।
ईपीसीएच के डीजी एवं चीफ मेंटर एंड आईईएमएल के चेयरमैन डॉ. राकेश कुमार ने निर्यातकों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट और ईपीसीएच की पूरी कोशिश रहेगी कि अमेरिकी टैरिफ की मौजूदा स्थिति का पूरा लाभ हस्तशिल्प कारोबार को दिलाया जाए। मार्ट के फरवरी के फेयर के अलावा न्यूयार्क में चल रहे शो समेत बर्मिंघम, यूके, फ्रैंकफुर्त फेयर में भी सार्थक असर देखने को मिलेगा। फिलहाल ईपीसीएच का पूरा फोकस फरवरी फेयर को सफल बनाने पर है। इसके लिए तैयारियां तेज हो चुकी हैं।