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... जब अनुच्छेउ 370 पर मुरादाबाद में गरजी थीं सुषमा

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ बातचीत करते मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल।
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मुरादाबाद। ये वर्ष 1998 की बात है। अटल जी की सरकार गिर चुकी थी। वाजपेयी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रहीं सुषमा स्वराज भारतीय जनता युवा मोर्चा के बुलावे पर मुरादाबाद आई थीं। उस वक्त युवा मोर्चा की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य मनोज गुप्ता ने ‘संविधान समीक्षा क्यों’ विषय पर पंचायत भवन में विचार गोष्ठी का आयोजन किया था। शहर के तमाम बुद्धिजीवियों को इस गोष्ठी में बुलाया गया था। मुरादाबाद के इस मंच से सुषमा ने 1998 में कहा था कि अनुच्छेद 370 को नेहरू जी की भूल थी, जिसे सुधरना ही होगा।
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भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता बताते हैं कि भीड़ से खचाखच भरे पंचायत भवन में सुषमा स्वराज ने कहा था कि संविधान की समीक्षा होना ही चाहिए। ताकि जहां खामियां हैं उन्हें दुरुस्त किया जा सके। उन्होंने कहा था कि कश्मीर का विकास तभी संभव है जब वहां से अनुच्छेद 370 को खत्म किया जाएगा। मुरादाबाद के इसी मंच से सुषमा ने देश में समान नागरिक संहिता की भी पुरजोर वकालत की थी। सुषमा को सुनने के लिए उस समय शहर का बुद्धिजीवी वर्ग उमड़ पड़ा था। भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ ही शहर के चिकित्सक, प्रोफेसर, अधिवक्ता और उद्यमी तक पंचायत भवन पहुंचे थे। सुषमा ने अपने भाषण में कहा था कि यदि देश एक स्वर में आवाज देगा तो वह दिन दूर नहीं जब कश्मीर को आतंक का जख्म देने वाला अनुच्छेद 370 इतिहास बनकर रह जाएगा। उन्होंने एक ही देश में दो झंडों का कड़ा विरोध करते हुए जनता से एकजुट होने का आह्वान किया था। अनुच्छेद 370 के खात्मे वाले दिन ही सुषमा की विदाई से मुरादाबाद के भाजपाई उनके पुराने भाषण को याद करके भावुक हैं। भाजपाइयों का कहना है कि सुषमा जी की हार्दिक इच्छा थी कि अनुच्छेद 370 का खात्मा हो लेकिन इस तरह इस ऐतिहासिक फैसले के 24 घंटे के भीतर ही वह दुनिया छोड़ जाएंगी यह किसी ने नहीं सोचा था।
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