मुरादाबाद। सुपरवाइजर भूपेंद्र हत्याकांड में फिर नया मोड़ आ गया है। अब सुपरवाइजर के भाई सोनू ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े किए हैं। उसने कहा कि पुलिस ने मेरे साथ धोखा किया है, मुझे तहरीर नहीं पढ़ाई थी केवल हस्ताक्षर कराए थे। मेरे भाई को पुलिसकर्मियों ने पीटते हुए गाड़ी में डाला था। पुलिस ने केवल आरोपी महिला साधना और उसके दो भाइयों के खिलाफ ही केस दर्ज किया है। तीनों पुलिसकर्मी भी उतने ही दोषी हैं, जितनी मृतक सुपरवाइजर की पत्नी और साले। इस मामले में अफसरों से शिकायत कर पुलिस के इस खेल की जांच कराने की मांग करेंगे।
भोजपुर के गांव सेहल निवासी भूपेंद्र पांडे के छोटे भाई प्रकाश चंद्र उर्फ सोनू पांडे पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। शनिवार को घटनाक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पुलिस ने हमारे साथ धोखा किया। मुझसे तहरीर पर हस्ताक्षर कराए। भाई की मौत की वजह से मैं इतना होश में नहीं था कि कौन किस कागज पर हस्ताक्षर करा रहा है। मुझे केवल मौखिक बताया गया कि केस में भूपेंद्र की पत्नी, उसके दो भाई प्रदीप और विनोद और पिटाई करने वाले तीनों पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया जा रहा है। पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अब पता चला कि केस में पुलिसकर्मियों को बचाया गया है, जबकि मेरी आंखों के सामने ही पुलिसकर्मियों ने मेरे भाई की डंडे से पिटाई की थी।
मेरे भाई को पीटते हुए गाड़ी में बैठाया....
सोनू बताया कि शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे मैं दरवाजे पर खड़ा था। इसी दौरान डायल 112 के तीन पुलिसकर्मी आए। उन्होंने मेरे भाई के बारे में पूछा, तभी भाभी अपने मकान से बाहर आई और पुलिसकर्मियों को अंदर ले गई। कुछ ही देर में पुलिसकर्मी मेरे भाई भूपेंद्र को कमरे से पीटते हुए खींचकर बाहर आए और गाड़ी में डाल लिया। हमने बीच में आने की कोशिश की तो पुलिसकर्मियों ने धमकी दी कि अगर कोई बीच में आया तो पूरे परिवार को जेल में डाल देंगे।
मेरे भाई को इंसाफ मिले
भूपेंद्र के भाई सोनू का आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें धमकी दे रहे थे कि अगर हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो हम केस कमजोर कर देंगे। सोनू की मांग है कि मेरे भाई को इंसाफ मिलना चाहिए। पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।
हत्यारोपी महिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
मुरादाबाद। निजी अस्पताल के नर्सिंग सुपरवाइजर भूपेंद्र पांडे की हत्या के मामले में गिरफ्तार पत्नी साधना को पुलिस ने शनिवार दोपहर अदालत में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में महिला के दो भाई भी आरोपी हैं।
गांव सेहल निवासी भूपेंद्र पांडे की शादी तीन साल पहले रामपुर जिले के मिलक थाना क्षेत्र के गंगापुर निवासी साधना के साथ हुई थी। भूपेंद्र पांडे विवेकानंद अस्पताल में नर्सिंग सुपरवाइजर थे और गांव में क्लीनिक चलाते थे। शुक्रवार सुबह पति-पत्नी के विवाद की सूचना पर डायल 112 पुलिस गांव पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने भूपेंद्र को डंडों से पीटा और अपनी गाड़ी में डाल लिया। कुछ देर बाद गांव के लोगों ने गाड़ी का दरवाजा खोलकर देखा तो भूपेंद्र की मौत हो चुकी थी। शुक्रवार को सुपरवाइजर की हत्या को लेकर काफी बवाल हुआ था। ग्रामीणों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए कांठ रोड पर जाम लगाया था, लेकिन शाम तक मामला कुछ और ही सामने आया। मृतक के भाई ने भूपेंद्र की पत्नी साधना और उसके दोनों भाई प्रदीप व विनोद पर हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। शनिवार को पुलिस ने आरोपी महिला साधना को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार दोपहर आरोपी महिला को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विमल वर्मा की अदालत में पेश किया गया, लेकिन मजिस्ट्रेट शनिवार को अवकाश पर थे। इस कारण से आरोपी का रिमांड सीजेएम (तृतीय) अनूप कुमार पांडेय की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया।