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Moradabad News: शुभम शर्मा की पहचान ओढ़कर सात साल छिपता रहा सुमित

सार

मुरादाबाद के सुमित ने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए कोर्ट परिसर में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भूरा की गोली मारकर हत्या की थी। जेल से फरार होने के बाद वह सात साल तक शुभम शर्मा नाम से छिपता रहा। आखिरकार एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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विस्तार
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मुरादाबाद। बदायूं जेल की दीवार फांदकर भागा सुमित सात साल तक शुभम शर्मा नाम की पहचान ओढ़कर छिपता रहा। इस दौरान उसने मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया। इस वजह से सुरक्षा एजेंसियां उसका सुराग नहीं लगा पाई। दिल्ली, असम, उड़ीसा, असम में जगह बदल बदल कर रहता रहा। इस दौरान वह एक बार नेपाल भी गया लेकिन कुछ समय बाद ही वापस आ गया।
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सुमित के परिवार के कई सदस्य पुलिस विभाग में हैं। इसलिए उसे पुलिस के कामकाज के बारे में काफी जानकारी है। वह किसी भी परिजन से मोबाइल के जरिये बात नहीं करता था। सोशल मीडिया पर भी किसी से संपर्क नहीं रखता था। वह साल में एक या दो बार किसी राह चलते शख्स से मोबाइल फोन मांगकर पड़ोसियों को कॉल कर परिजनों से बात करता था। एसटीएफ को कई बार इसकी भनक लगी पर टीम सिर्फ उस शख्स तक पहुंच सकी जिसके नंबर से सुमित ने बता की थी। थक हारकर एसटीएफ ने मुखबिरों का सहारा लिया तो सुमित को पकड़ने में कामयाबी मिली। एसटीएफ ने पूछताछ की तो उसने बताया कि वह जेल से भागने के बाद मेरठ चला गया था। इसके बाद दिल्ली फिर अलग-अलग राज्यों में शुभम शर्मा के नाम से घूमता रहा। इस दौरान उसने न तो कभी दोस्तों से मिलने का प्रयास किया और न ही परिवार से सीधे बात की थी।
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भाई की हत्या में समझौता कर जीता विश्वाास, फिर पैर छूकर मारी थीं चार गोलियां
मुरादाबाद। सुमित और उसके पिता रामवीर सिंह ने रिंकू की हत्या के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भूरा से समझाैता कर विश्वास जीत लिया था। भूरा भी निश्चिंत हो गए थे कि अब एक दो तारीख के बाद उन्हें जमानत मिल जाएगी। घटना वाले दिन पुलिस कस्टडी में भूरा को जेल से कोर्ट लाया गया था। पुलिसकर्मियों ने भूरा को कोर्ट के बाहर ही बेंच पर बैठा दिया था। इसी दौरान सुमित अपने ममेरे भाई के साथ भूरा के पास पहुंच गया और उसने भूरा के पैर छूकर राम-राम की। भूरा ने जवाब ही दिया कि सुमित और उसके ममेरे भाई ने फायरिंग कर दी थी।
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सुमित के पिता रामवीर सिंह और भूरा आपस में ममेरे फुफेरे भाई थे। दोनों परिवारों में अच्छे संबंध थे। रामवीर सिंह का बड़ा बेटा रिंकू भूरा के नवीन नगर स्थित आवास में रहकर ही हिंदू कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था और भूरा के दम पर ही कॉलेज में छात्र राजनीति कर रहा था। 2013 में सिविल लाइंस में चट्टा पुल के पास सुमित के भाई रिंकू चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शार्प शूटर के तौर पर रिंकू की पहचान थी। रिंकू पहले ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र का दाहिना हाथ था पर बाद में दोनों में अनबन हो गई थी। तब रिंकू हत्याकांड में योगेंद्र को नामजद कराया गया था।
सुमित ने भाई की हत्या का बदला लेने की कसम ली थी। योजना के तहत उसने योगेंद्र उर्फ भूरा से फिर करीबी बढ़ाई। रिंकू हत्याकांड में योगेंद्र जेल से कोर्ट में पेश होने आए तो सुमित ने अपने साथियों के संग वहां गया था। उसने भूरा को राम-राम चाचा कहा और उसके पैर छूने के लिए झुका। पलक झपकते ही सुमित और उसके ममेरे भाई पंकज ने ताबड़तोड़ चार गोलियां योगेंद्र के सीने में उतार दी थी।
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सुमित ने हिंदू कॉलेज में भी थी फायरिंग
मुरादाबाद। रिंकू चौधरी की हत्या के बाद सुमित ने 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद हिंदू कॉलेज में दाखिल लिया और अपने भाई के रास्ते पर चलने लगा था। कॉलेज में तमंचा लेकर आता था। 2013 में ही उसका विवाद कुछ युवकों से हो गया था। इस दौरान उसने तमंचे से फायरिंग कर दी थी। पुलिस ने उसे हिंदू कॉलेज में ही तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था। तब सुमित के खिलाफ पहला केस दर्ज किया गया था। इसके बाद 2014 में एक केस हजरत नगर गढ़ी, 2010 में बिलारी पुलिस ने भी सुमित को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था। 2015 में उसके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में हत्या और दूसरा मुकदमा आर्म्स एक्ट में दर्ज किया गया था। इसके बाद बदायूं के सिविल लाइंस थाने में 2018 में दर्ज किया गया था। इसके बाद 2023 में मुरादाबाद के सिविल लाइंस थाने में भी एक केस पुलिस की ओर से दर्ज किया गया था।
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ब्लॉक प्रमुख का परिवार कर चुका था कई बार आरोपी गिरफ्तारी की मांग
मुरादाबाद। सुमित की फरारी में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भूरा के परिवार को हर वक्त खतरा बना रहता था। कई बार यह परिवार पुलिस अफसरों और लखनऊ तक प्रार्थना पत्र देकर गिरफ्तारी की मांग कर चुका था लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पा रही थी।
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