नस्लीय हमले के शिकार दक्षिणी सूडान के छात्र चोल अकोचा ने मुरादाबाद छोड़ दिया है। मुरादाबाद के एक इंस्टीट्यूट में बीएमएलटी की पढ़ाई करने आए चोल अकोचा और उसके साथी के काले रंग को लेकर टिप्पणियां की जाती थीं। भद्दी टिप्पणियों से बचने के लिए दोनों सूडानी छात्र ज्यादातर वक्त पाकबड़ा में प्राइवेट हास्टल में स्थित अपने रूम में खुद को बंद रखते थे।
लेकिन इसके बावजूद एक दिन हमलावरों ने हास्टल में घुसकर चोल और उसके दूसरे सूडानी साथी की बेरहमी से पिटाई कर दी थी। जिसके बाद से दोनों छात्र दहशतजदा थे। अब इनमें से एक ने कोर्स बीच में ही छोड़कर अपना वीजा गाजियाबाद के लिए डायवर्ट करा लिया है।
दक्षिणी सूडान के खार्तुम शहर निवासी अवर मोम्बको और उसी के शहर का चोल अकोचा पिछले साल बीसीए और बीएमएलटी करने के लिए भारत आए थे। दोनों ने मुरादाबाद के एक इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया था। ये दोनों छात्र पाकबड़ा में ख्वाजा नगर स्थित रियासत अली के मकान में चल रहे प्राइवेट हॉस्टल में रहते थे।
जहां काला रंग होने की वजह से दोनों पर भद्दी टिप्पणियां की जाती थीं। नौ मई 2015 को बीएमएलटी प्रथम वर्ष का छात्र चोल अकोचा और उसका साथी बीएससी छात्र अवर मोम्बको हास्टल में अपने रूम में पढ़ रहे थे। तभी सात - आठ लोगों ने कमरे में घुसकर दोनों की बेहरमी से पिटाई कर दी थी।
सूडानी छात्रों पर नस्लीय हमले की घटना से सरकार तक खलबली मच गई थी। चोल अकोचा की तहरीर पर एफआईआर दर्ज करके पुलिस ने इंस्टीट्यूट के बाहर चाय की दुकान चलाने वाले फारूख और छात्र महेश गंगवार व रणवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।
लेकिन इस घटना से सूडानी छात्रों के दिल में दहशत पैवस्त हो गई। चोल अकोचा ने बीएमएलटी की पढ़ाई पूरी करने के बजाए करीब बीस दिन पहले मुरादाबाद छोड़ दिया है। उसने अपना वीजा नितिन खंड इंद्रापुरम गाजियाबाद के लिए डायवर्ट करा लिया है।