तीन महीने पहले छात्रा को कुत्ते ने काटा तो एंटी रैबीज लगवाने के बजाए घर वाले झाड़ फूंक के चक्कर में उलझकर रह गए। घर वालों की इस गलती ने छात्रा की जान ले ली। घटना कुंदरकी के गांव मिलक बांहपुर की है। तीन महीने पहले दस साल की रजनी को कुत्तों ने काटा था।
एंटी रैबीज नहीं लगने की वजह से वह हाईड्रोफोबिया की शिकार हो गई और सोमवार को तड़प - तड़प कर उसकी मौत हो गई। डर है कि घर वाले भी रैबीज के शिकार हो सकते हैं, लिहाजा पूरे परिवार को एंटी रैबीज लगाया गया है।
कुंदरकी थाना क्षेत्र के गांव मिलक बांहपुर निवासी श्याम लाल की दस वर्षीय बेटी रजनी पर तीन माह पहले कुत्ते ने हमला कर दिया था। तीसरी की छात्रा रजनी के पैर में तीन जख्म हुए थे। कुत्ते के काटने पर परिजनों ने सरकारी अस्पताल में एंटी रैैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाए बल्कि घरेलू इलाज करते रहे।
हालांकि घरेलू उपचार से कुत्ते के काटने के जख्म तो भर गए लेकिन रैबीज का असर रजनी के शरीर में बरकरार रहा। तीन माह बाद जब रजनी के दिमाग पर रैैबीज का असर हुआ तो वह पानी को देखकर डरने लगी और उसकी हरकतें भी सामान्य जैसी नहीं रही।
इससे परिजन घबरा गए और उन्होंने मुरादाबाद केे निजी अस्पताल में दिखाया जिसके बाद हाईड्रोफोबिया होने की पुष्टि हुई। छात्रा रजनी की मौत से घर वालों में कोहराम मच गया। परिजन इस घटना के बाद से सहमे हैं। क्योंकि डाक्टरों ने आशंका जताई है कि रजनी की वजह से पूरे परिवार में रैबीज फैलने की आशंका है।
डाक्टरों का कहना है कि रैबीज की शिकार रजनी मरने से पहले तीन महीने तक परिवार के साथ रही। उसने सभी के साथ खाया - पिया होगा, ऐसे में रैबीज बाकी परिजनों में भी फैल सकता है। लिहाजा सोमवार को कुंदरकी पीएचसी पर रजनी के पिता श्याम लाल, मां रामश्री, बहन राधा, आशा, वर्षा, भाई सचिन, नानी सोमवती को एंटी रैबीज इंजेक्शन दिए गए।