मुरादाबाद। उपचुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर बड़ी जीत दर्ज करने वाले रामवीर सिंह का राजनीतिक सफर कॉलेज के दाैर से शुरू हुआ था। मूंढापांडे ब्लाॅक के दौलारी गांव निवासी रामवीर सिंह एमए, एलएलबी हैं।
रामवीर सिंह के पिता शिवराज सिंह सहकारी संघ मूंढापांडे के सभापति रह चुके हैं, जबकि बड़े भाई जसवीर सिंह करीब 35 साल तक दाैलारी के ग्राम प्रधान रहे हैं। छात्र राजनीति से सफर शुरू करने वाले रामवीर सिंह ने 1993 में भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्हें 1999 में किसान मोर्चा का जिला महामंत्री बनाया गया। 2001 में रामवीर सिंह ने अपनी पत्नी संतोष देवी को मूंढापांडे की प्रमुख बनवाया। 2005 में भाजपा में जिला महामंत्री के अलावा प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य बनाए गए।
2007 के विधानसभा चुनाव में रामवीर सिंह पहली बार मुरादाबाद देहात विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे। इस चुनाव में उन्हें सिर्फ तीन हजार मतों से हार का सामना करना पड़ा था। हार के बाद भी सपा प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देेने से उनकी राजनीतिक साख मजबूत हुई।
यह वजह रही कि मूंढापांडे ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी या तो उनके परिवार के पास रही या उनके किसी करीबी को मिली। परिसीमन के बाद जब मूंढापांडे क्षेत्र मुरादाबाद देहात विधानसभा से हटकर कुंदरकी विधानसभा का हिस्सा बना तो रामवीर ने कुंदरकी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी।
कुंदरकी क्षेत्र से रामवीर सिंह ने 2012 और 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन दोनों बार उन्हें सपा प्रत्याशी हाजी रिजवान से हार का सामना करना पड़ा। हार के बावजूद वह क्षेत्र में सक्रिय रहे। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने रामवीर सिंह के बजाय कमल को टिकट दिया, लेकिन भाजपा को सफलता नहीं मिली।
इसके बाद 2024 के उपचुनाव में पार्टी ने फिर से रामवीर पर भरोसा जताया और चाैथी बार टिकट दिया। पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए रामवीर ने इस बार सपा प्रत्याशी हाजी रिजवान को 1.44 लाख मतों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। रामवीर सिंह की पत्नी संतोष देवी वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। रामवीर सिंह के भाई जयवीर सिंह भाकियू टिकैत गुट के जिला उपाध्यक्ष हैं। पांच भाइयों में रामवीर सबसे छोटे हैं। उनके दो भाइयों की माैत हो चुकी है।