मुरादाबाद जिला कारागार के तत्कालीन जेलर रीवन सिंह ने जेल में भ्रष्टाचार और सट्टा कराए जाने की शिकायत की थी। 27 अप्रैल को जेलर की शिकायत पर जांच आगरा-मेरठ परिक्षेत्र के डीआईजी अखिलेश कमार को जांच सौंपी गई थी।
जिला कारागार में सट्टे का कारोबार किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस कारोबार को बैरक में बंद कोई अपराधी नहीं, बल्कि खुद तत्कालीन जेल अधीक्षक करा रहे थे। डीआईजी जेल की जांच रिपोर्ट में इसी बात का दावा किया गया है। जांच पूरी करने बाद डीआईजी जेल ने अपनी रिपोर्ट पुलिस महा निदेशक (कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं) को सौंप दी है।
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मुरादाबाद जिला कारागार के तत्कालीन जेलर रीवन सिंह ने जेल में भ्रष्टाचार और सट्टा कराए जाने की शिकायत की थी। 27 अप्रैल को जेलर की शिकायत पर जांच आगरा-मेरठ परिक्षेत्र के डीआईजी अखिलेश कमार को जांच सौंपी गई थी। डीआईजी जेल ने तीन मार्च 2021 को मुरादाबाद जेल पहुंचकर इस मामले की जांच की थी।
उन्होंने यहां जेल अधीक्षक, जेलर, बंदी और हेड जेलर वार्डर के बयान दर्ज किए थे। जांच पूरी करने के बाद डीआईजी ने अपनी रिपोर्ट जांच दी। जिसमें तत्कालीन जेल अधीक्षक उमेश सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ ही रिपोर्ट दर्ज कराने की संस्तुति की।
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इसके अलावा हेड जेल वार्डर सत्येंद्र सिंह और ह्दय नारायण की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि उनके आने से पहले का मामला है। डीआईजी जेल अखिलेश कुमार ने इस मामले में जांच की थी। जांच रिपोर्ट डीजी जेल को सौंपी गई है।