मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से एक दशक पहले तैयार किया गया सोर्सिंग हब इसी हालत में उद्योग विभाग के सुपुर्द किया जाएगा। इसकी खामियों को दूर करके इसे आबाद करने का जिम्मा अब उद्योग विभाग का होगा। 32 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी प्राधिकरण इसे पूरा नहीं कर सका है। सोर्सिंग हब के निर्माण में कई घोटाले भी उजागर हुए। ठेकेदार के खिलाफ प्राधिकरण ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई। लेकिन प्राधिकरण आरोपियों पर शिकंजा कसने और सोर्सिंग हब को पूरा करने में नाकाम रहा। निर्यातकों को एक ही छत के नीचे अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने के लिए सोर्सिंग हब का निर्माण किया गया था। दिल्ली हाईवे पर जीरो प्वाइंट पर सोर्सिंग हब का निर्माण करीब 12 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। शुरू में इसकी लागत 22 करोड़ रुपये थी। जो बढ़ते - बढ़ते 32 करोड़ तक पहुंच गई। सोर्सिंग हब के निर्माण का ठेका एक पूर्व मंत्री के समधी को दिया गया था। सोर्सिंग हब में जो भी उपकरण लगने थे उनकी खरीद में तो अधिकारियों ने दिलचस्पी दिखाई लेकिन सोर्सिंग हब का निर्माण पूरा कराने पर ध्यान नहीं दिया। यही वजह है कि सोर्सिंग हब घोटालों की भेंट चढ़ता गया और इसका निर्माण 12 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। इसमें लगे उपकरण कबाड़ हो चुके हैं और बिल्डिंग खंडहर की शक्ल अख्तियार कर रही है। अब इसे उद्योग विभाग को सौंपने की कवायद शुरू हुई है।
- प्राधिकरण द्वारा बनाया गया सोर्सिंग हब उद्योग विभाग को इसी हाल में सौंपा जाएगा। इसकी कमियों को दूर करके इसके संचालन का जिम्मा उद्योग विभाग का होगा। - यशवंत राव, कमिश्नर।