लॉकडाउन खुलने का इंसान ही नहीं कई दिवंगत आत्माएं भी इंतजार कर रही हैं। विसर्जन नहीं होने से कई दिवंगत लोगों की अस्थियां मोक्षधाम के लॉकरों में कैद हैं। मोक्षधाम में प्रतिदिन औसतन चार से पांच अंत्येष्टि के बाद अस्थियां लॉकरों में सुरक्षित जमा हो रही हैं।
हिंदू धर्म में मृत्यु के तीसरे दिन दिवंगत आत्मा की शांति के लिए अस्थियां को विसर्जित करने की मान्यता है। मुरादाबाद के अधिकतर लोग हरिद्वार और ब्रज घाट में अस्थियों का विसर्जन करते हैं। इस मान्यता पर कोरोना लॉकडाउन की विपदा भारी पड़ रही है। बार्डर सील हैं और वाहनों का आवगमन पूरी तरह बंद है। अस्थियां विसर्जन के साथ परिवार के शुद्धिकरण जैसे सामाजिक रीति रिवाज की परंपराओं के निर्वहन में भी लोगों को मुश्किलें हो रही हैं।
लोकोशेड स्थित मोक्षधाम के चौकीदार विजेंद्र बताते हैं, प्रतिदिन औसतन चार से पांच अंत्येष्टि होती हैं। परिवारजन दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए अस्थियां चुनते हैं और विसर्जन करते हैँ। अब चूंकि जा नहीं पा रहे हैं तो अस्थियों को लॉकरों में रख रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद मोक्षधाम के लॉकर अस्थि कलशों से भरने की स्थिति में हैं।
लॉकडाउन खुले तो अस्थियों के विसर्जन के साथ आत्माओं को शांति मिले। लोकोशेड स्थित मोक्षधाम के अलावा लालबाग, आशियाना स्थित मोक्षधाम में भी ऐसे ही हालात हैं। दिवंगतों की अस्थियों को लॉकर में ही रखा जा रहा है।
अस्थियां अंत्येष्टि के तीन दिन बाद विसर्जन की जा सकती हैं। गरुड़ पुराण में इसका उल्लेख है। यदि किसी कारणवश विसर्जन नहीं की जा सकती हैं तो तीन महीने तक शमशान घाट में रखी जा सकती है। कई दिवंगत आत्माओं की अस्थियां रखी गई हैं और विधि विधान से शुद्धिकरण भी कराया जा रहा है।
- पुरोहित केदार मुरारी