उसने जब फोन कर बताया कि उसके लिए गिफ्ट छोड़ दिया है, तब उसे कोई अंदाजा नहीं था। जब वह रूम में पहुंची और गिफ्ट की तलाश की तो उसे एक सुसाइड नोट मिला। उसने तुरंत इस मामले की विश्वविद्यालय प्रबंधन को दे दी थी। करुणा रोज की तरह शुक्रवार सुबह जागी थी। इसके बाद वह तैयार हुई। इसके बाद वह परीक्षा देने चली गई थी।
सुसाइड नोट लिखकर पांचवीं मंजिल से छलांग लगाई
टीएमयू में शुक्रवार दोपहर को बीटेक की छात्रा करुणा विश्वकर्मा (20) ने सुसाइड नोट लिखकर पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। टीएमयू के हॉस्पिटल में करीब साढ़े छह घंटे के उपचार के बाद उसने दम तोड़ दिया। सुसाइड नोट में लिखा है- सॉरी मम्मी-पापा मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी। छोटी बहन को खूब पढ़ाना, वो आपका ध्यान अच्छे से रखेगी। आप सब अपना ख्याल रखना... करुणा लूजर। छात्रा ने अपने एक मित्र के लिए भी कुछ शब्द लिखे हैं।
मूल रूप से बिहार के मधुबनी जनपद के नगनिया की रहने वाली करुणा विश्वकर्मा टीएमयू के ओल्ड गर्ल्स हाॅस्टल में रहती थी। उसी कमरे में तीन अन्य छात्राएं भी रहती हैं। बीटेक मेकेनिकल प्रथम वर्ष की छात्रा करुणा ने शुक्रवार को परीक्षा दी। दिन में 11.30 बजे पेपर खत्म होने के बाद वह कॉलेज की पांचवीं मंजिल पर टहलने लगी।
17 नवंबर को हॉस्टल में पहुंची थी छात्रा
करुणा के सुसाइड करने के बाद पाकबड़ा पुलिस ने टीएमयू पहुंची। छात्रा की रूममेट और स्टाफ अन्य छात्राओं से पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि करुणा दिवाली की छुट्टी पर घर जाने की बात कहकर टीएमयू से गई थी, लेकिन वह अपने घर नहीं पहुंची। बिहार में ही अपने एक मित्र से मिलने चली गई थी। बताया जा रहा है कि छात्रा के मित्र का 26 नवंबर को जन्मदिन है, लेकिन वह उसे पहले ही गिफ्ट लेने के बाद बिहार से दिल्ली अपनी बुआ के घर चली गई थी। बुआ के घर रुकने के बाद वह 17 नवंबर को टीएमयू में लौटी थी।
आत्महत्या में मानसिक रोग विशेषज्ञ के सुझाव
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अनंत राणा का कहना है कि दूर रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों पर माता-पिता को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। अकेलेपन के कारण अपनी परेशानी किसी से न कह पाना आत्महत्या के ख्याल की सबसे बड़ी वजह है। युवाओं को ध्यान देना चाहिए यदि अपनी क्षमताओं या पसंद से विपरीत जाकर लक्ष्य निर्धारित किया है तो उसे बदलने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए।
जिंदगी बचने के एवज में यदि कुछ साल बर्बाद होते हैं तो हो जाएं। डॉ. राणा ने कहा कि आत्महत्या का विचार अचानक नहीं आता। कई दिन या कई महीनों से व्यक्ति अवसाद से जूझ रहा होता है। इस बीच वह अपने परिजनों व मित्रों को संकेत भी देता है कि वह कुछ गलत कदम उठा सकता है। परिजनों या मित्रों को इसे भांपकर उसकी काउंसलिंग करनी चाहिए। यदि खुद से बात नहीं बनती तो डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।