मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से शहर में 20 स्थानों पर स्थापित ई-कियोस्क धूल फांक रहे हैं। उचित प्रचार-प्रसार नहीं किए जाने के कारण लोग इस सेवा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इनमें कई स्थानों पर ई-कियोस्क खराब हैं।
1.57 करोड़ की लागत से स्थापित किए गए ई-कियोस्क सेंटर पर कई-कई दिन तक सन्नाटा पसरा रहता है। सेंटर के आसपास के लोग बताते हैं कि कभी-कभार ही कोई इस मशीन के आसपास पहुंचता है, जबकि सामान्य दिनों में यहां कोई भी नहीं आता। अधिकांश लोगों को तो मालूम भी नहीं है कि इस सेंटर पर उन्हें कौन सी सुविधाएं मिलती हैं।
प्रचार-प्रसार न होने के कारण ई-कियोस्क का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर लगे यह उपकरण निरर्थक साबित हो रहे हैं। वहीं, तीन सेंटर तो ऐसे हैं जहां ई-कियोस्क सेवा ठप पड़ी है। नगर निगम के पीलीकोठी कार्यालय में स्थापित ई-कियोस्क भी तीन सप्ताह से बंद है। यह सेंटर पूरी तरह से डिजिटल है। इस सेंटर पर नगर निगम की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
स्मार्ट सिटी के मुख्य अभियंता अनिल कुमार मित्तल का कहना है कि यह सेवा खासतौर पर युवाओं और बाहर से आने वाले लोगों के लिए मुहैया कराई गई है। सेंटर पर पूरे शहर की जानकारी उपलब्ध है। किसी भी दफ्तर, कॉलोनी, विभागों के अभिलेख, पुलिस थाना, होटल, प्रमुख मार्ग, पार्किंग, शौचालय, रोडवेज, रेलवे स्टेशन के अलावा बैंक से संबंधित जानकारियां भी इस सेंटर पर उपलब्ध हैं। मुख्य अभियंता का कहना है कि सेंटर का धीरे-धीरे इस्तेमाल बढ़ रहा है। जो सेंटर बंद हैं, वहां मेंटेनेंस कार्य कराए जा रहे हैं।
यहां स्थापित किए गए हैं ई-कियोस्क
नगर निगम कार्यालय पीलीकोठी, कुक्कुटशाला रोड, गुरहट्टी चौराहा, बुध बाजार, टाउन हाल, रोडवेज, कचहरी रोड, सदर तहसील, कांठ रोड, सिविल लाइंस थाना, अटल पथ, रामपुर रोड, वाणिज्य कर चौराहा, कंपनी बाग, जीएमडी रोड, कचहरी, डिप्टी गंज, ताड़ीखाना और रेलवे स्टेशन।
यह मिलती हैं सुविधाएं
ई-कियोस्क सेंटर पर कर जमा करने, मोबाइल रिचार्ज, बस व ट्रेन के टिकट की बुकिंग, जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन जैसी तमाम सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा ई-कियोस्क सेंटर पर बैंक लोन के साथ ही जाति, आय, निवास सहित अन्य प्रमाणपत्रों के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। सिटीजन चार्टर के अनुरूप निर्धारित दिनों में यह प्रमाणपत्र आवेदनकर्ता को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। इसके लिए आवेदकों को विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं।