मुरादाबाद। फैजगंज निवासी सोनी राघव 50 किलो भार वर्ग की पहलवान हैं। उनके पिता मनोज राघव गाजियाबाद में चाय की दुकान चलाते हैं। पांच साल पहले सोनी ने खेलना शुरू किया था तो लोगों ने ताने दिए कि पढ़ा-लिखा कर बेटी को किसी नौकरी पर लगा दो तो घर का खर्च चल जाएगा, लेकिन लोगों की बातों में आए बिना पिता बेटी को आगे बढ़ाते रहे। आज प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में सोनी राघव तीन बार पदक जीत चुकी हैं।
सोनी चौथी बार स्टेट चैंपियनशिप खेल रही हैं। 2018 में नेशनल में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। जब डाइट, अभ्यास, किट आदि के लिए रुपयों की ज्यादा जरूरत पड़ी तो मां लता राघव भी लोगों के घरों में काम करने लगीं, लेकिन बेटी को खेलने से नहीं रोका। यह कहानी अकेली सोनी की नहीं हैं।
सोनकपुर स्टेडियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में ऐसी कई बेटियां प्रतिभाग कर रही हैं, जिनके पिता उन्हें संघर्ष से सींच रहे हैं। किसी के पिता दूध बेचते हैं तो कोई चाय की दुकान चलाते हैं। मन में बस एक ही चाह है कि खुद तो कुछ नहीं कर पाए, लेकिन बेटी को अंतरराष्ट्रीय स्तर का पहलवान बनाना है। बेटियां भी अपने व मां-बाप के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी मेहनत कर रही हैं।
अयोध्या की अनु यादव के पिता रामवृक्ष यादव दूध बेचते हैं। अनु के अलावा उनके दो बेटियां व दो बेटे भी हैं। परिवार और अनु के खेल का खर्च कैसे चलता है। इस सवाल पर अनु की आंखें भर आईं। अनु ने कहा कि पापा सुबह पांच बजे उठ जाते हैं और रात नौ बजे तक काम करते हैं। दूध बांटने के अलावा छोटा-मोटा काम करते हैं। लक्ष्य पूछा तो अनु बोलीं कि नेशनल गेम्स में मेडल जीतकर सरकारी नौकरी लेकर रहेंगे।
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मुस्लिम बेटियां भी कुश्ती में आगे
अमरोहा निवासी 40 किलो भार वर्ग की खिलाड़ी शबाना परवीन भी इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही हैं। शबाना मंडल स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में पहुंची हैं। जीजीआईसी अमरोहा में कक्षा आठ की छात्रा शबाना को स्कूल की शिक्षिका आंचल ने कुश्ती में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। शबाना ने बताया कि परिवार के लोगों ने बहुत विरोध किया, लेकिन मां सलमा खातून हमेशा उनके समर्थन में रहती हैं। मां का कहना है कि तू खेल, बाकी सब मैं देख लूंगी।
नेशनल गेम्स में जीता कांस्य पदक
संभल निवासी कक्षा आठ की छात्रा आयुषी सागर के पिता राजेंद्र सिंह संविदा लाइनमैन हैं। बेहद कम वेतन में परिवार पालने वाले राजेंद्र का नाम आयुषी लगातार रोशन कर रही हैं। वह स्टेट चैंपियनशिप में सात बार पदक जीत चुकी हैं। छोटा भाई संजय भी उनसे प्रेरणा लेकर कुश्ती सीखने लगा है। कोच भोले सिंह त्यागी भी उनकी मदद करते हैं। आयुषी नेशनल गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
नेशनल में मेडल जीतना तराना का लक्ष्य
संभल निवासी 72 किलो भार वर्ग की पहलवान तराना के पिता इरफान किसान हैं। वह खुद पहलवान रहे हैं। सात बेटे-बेटियों वाले परिवार में पिता के बाद तराना अकेली पहलवान हैं। समाज के लोगों ने पिता को खूब ताने दिए, लेकिन बेटी के प्रदेश स्तर पर पदक जीतने के बाद से सब खामोश हैं। अब एक बार भी फिर तराना स्टेट चैंपियनशिप के जरिये नेशनल की राह पर हैं। नेशनल में मेडल जीतना उनका लक्ष्य है।