एफसीआई गोदाम से खराब गेहूं मिलने की घटना के बाद से महकमे में हड़कंप है। एफसीआई के मंडलीय प्रबंधक रोहित नागपाल ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए डिपो इंचार्ज कुमार सौरभ के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। इस कमेटी को जांच कर जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। कोटेदारों को वितरण के लिए उसके स्थान पर दूसरा गेहूं भेजा जाएगा।
मंडलीय प्रबंधक ने कहा कि एफसीआई में जिले के विभिन्न क्रय केंद्रों से खरीदा गया गेहूं एफसीआई गोदाम पर पहुंचता है। हालांकि क्रय केंद्र से गोदाम पहुंचने वाले गेहूं को चेक करने के बाद ही गोदाम में उतरवाने की व्यवस्था है। इसके बाद भी यह चूक कैसे हुई यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा। उन्होंने बताया कि गोदाम में क्रय एजेंसी से लाए गए गेहूं को अलग-अलग चट्टों में लगाया जाता है। जिससे यह पता लग जाएगा कि संबंधित गेहूं किस क्रय केंद्र से गोदाम लाया गया था। इस घटना के बाद से अब और सतर्कता बरती जाएगी।
ये है खाद्यान्न आपूर्ति की व्यवस्था
जिले में साढ़े पांच लाख से अधिक राशनकार्ड धारक हैं। जिन्हें प्रतिमाह खाद्यान्न के रूप में गेहूं व चावल का वितरण सरकारी सस्ते गल्ले (कोटे) की दुकानों से किया जाता है। उपभोक्ताओं के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था एफसीआई के माध्यम से की जाती है। एफसीआई गोदाम से ट्रक में लोड होकर उसे मंडी स्थित एसएफसी के गोदाम में पहुचाता है। वहां से यह खाद्यान्न पुन: ट्रकों में लोड होकर कोटेदारों की दुकान तक पहुंचाया जाता है। अगर यह ट्रक एसएफसी गोदाम पर नहीं पकड़ा जाता तो यह गंदा गेहूं कोटेदारों तक पहुंच जाता और तब इसका पता उपभोक्ताओं को वितरित करने के समय पता लग पाता। तब इसका सारा ठीकरा कोटेदार के सिर फोड़ा जाता।