मुरादाबाद। ऑनलाइन लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में फर्जीवाड़े के मामले सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने सारथी पोर्टल पर एआई तकनीक के माध्यम से एक नया विकल्प जोड़ दिया है। अब लर्निंग लाइसेंस की प्रक्रिया के दाैरान सत्यापन के लिए आवेदक को कैमरे के सामने बैठकर पहले पांच बार मुस्कुराना पड़ेगा, फिर कई बार पलकें झपकानी हाेंगी। इसके बाद टेस्ट में पास होने पर ही लाइसेंस जारी होगा। इस तकनीक के जरिये फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।
18 वर्ष से अधिक के लोगों को लर्निंग लाइसेंस देने के लिए परिवहन विभाग की ओर से ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था है, लेकिन इसमें सेंध लग गई। साइबर कैफे संचालक बिना परीक्षा दिए ही आवेदक को टेस्ट पास कराकर लर्निंग लाइसेंस बनवाने लगे थे। बदले में आवेदक से 500 से 2000 रुपये तक अतिरिक्त वसूल रहे थे। इससे जुड़े कई मामले सामने आने के बाद परिवहन विभाग के अधिकारी परेशान थे।
अब आवेदक को स्वयं कैमरे के सामने बैठना होगा और अपना सत्यापन कराना होगा। नई तकनीक से फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। साथ ही वैध लर्निंग लाइसेंस जारी हो सकेंगे।
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असफल होने पर दोबारा देना होता है टेस्ट
साइबर कैफे के संचालक नितेश कुमार ने बताया कि अधिकांश आवेदक ऑनलाइन टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसमें ट्रैफिक नियमों से जुड़े 15 प्रश्न होते हैं। इनमें नौ प्रश्नों के जवाब सही होने अनिवार्य हैं। असफल होने पर उन्हें दोबारा आवेदन करने के लिए 150 रुपये अधिक शुल्क जमा करना होता है। पहली बार में 200 रुपये शुल्क है। ऐसे में आवेदक साइबर कैफे वालों को रुपये देने में आनाकानी करते थे। इससे बचने के लिए साइबर कैफे संचालकों ने ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर फर्जीवाड़ा करने का रास्ता ढूंढ लिया था।
मृतकों के भी जारी हो गए थे डीएल
दो पहिया व चौपहिया वाहन चालकों को परिवहन विभाग ने घर बैठे डीएम देने की व्यवस्था छह जनवरी 2022 से कर रखी है। कुछ समय पहले प्रदेश के कई जिलों में फर्जी लाइसेंस जारी होने के मामले सुर्खियों में आए थे। इसमें कुछ मृतकों के भी लाइसेंस जारी हो गए थे। बिना आवेदक के परीक्षा दिए ही लाइसेंस जारी होने की भी शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके बाद ही सिस्टम में सत्यापन संबंधी नया विकल्प जोड़ने के लिए विभाग ने परिवहन मंत्रालय से सिफारिश की थी।
आवेदक के सत्यापन के लिए सारथी पोर्टल पर एआई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इससे फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी। कुछ मृतकों के भी लर्निंग लाइसेंस जारी होने के बाद सवाल उठ रहे थे। हालांकि, मुरादाबाद में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया।
- हरिओम, संभागीय निरीक्षक, प्राविधिक