मुरादाबाद। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए शहर के 400 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे विभिन्न गतिविधियों पर नजर तो रखी ही जाएगी साथ ही दिल्ली की तर्ज पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों का चालान भी काटे जा सकेंगे। यही नहीं शहर में होने वाले अवैध निर्माण कार्यों की भी निगरानी इस ‘तीसरी आंख’ से की जाएगी। मानीटरिंग के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित कर उसमें अन्य कई विभागों को भी जोड़ा जाएगा। विभिन्न प्रकार के विकास कार्य भी कराए जाएंगे। कमिश्नर की अध्यक्षता में मुरादाबाद स्मार्ट सिटी निदेशक मंडल की कमिश्नर कार्यालय में बुधवार हुई बैठक में इस पर खर्च होने वाली धनराशि की अंशपूंजी के रूप में 120 करोड़ रुपये निर्गत किए जाने का अनुमोदन भी प्रदान कर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंडलायुक्त यशवंत राव ने शहर को स्मार्ट बनाने के कार्य में लगे अधिकारियों को भारत सरकार की गाइड लाइन व अर्बन प्लानिंग और इंजीनियरिंग के स्वर्णिम सिद्धांतों का अनुपालन करते हुए शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित का काम करें। उन्होंने स्वीकृत प्रोजेक्टों पर कार्य के लिए टेंडर आदि कर शीघ्र कार्य शुरू करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए।
नगर आयुक्त संजय चौहान ने निदेशक मंडल के समक्ष निर्धारित एजेंडा प्रस्तुत करते हुए बताया कि नगर निगम प्रशासन ने शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए 43 प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजे थे। जिनमें से 12 प्रोजेक्टों की डीपीआर को स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने उन सभी 12 प्रोजेक्टों पर काम के लिए धन निर्गत किए जाने की स्वीकृति के लिए निदेशक मंडल का आभार जताया। बैठक में कमिश्नर ने एसपीवी में विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए भारत सरकार की इंपैनल्ड एजेंसी से रखने का अनुमोदन दिया गया। कंपनी सचिव का वेतन साठ हजार से बढ़कर 75 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया। आरएफपी परीक्षण के लिए समिति का भी गठन किया गया। जिसमें मुख्य अभियंता पीडब्ल्यूडी, मुख्य अभियंता एमडीए, मुख्य अभियंता नगर निगम को शामिल किया गया। तय किया गया कि विषय विशेषज्ञ नगर आयुक्त के द्वारा तय किए जाएंगे। बैठक में जिलाधिकारी/उपाध्यक्ष एमडीए राकेश कुमार सिंह, स्मार्ट सिटी नोडल अधिकारी टीएन मिश्र के अलावा कंपनी के सीए, सेक्रेटरी, इंजीनियर, प्रोजेक्ट मैनेजर, कांसलटेंट आदि भी मौजूद रहे।