मुरादाबाद। लकड़ी कारोबारियों की बोगस फर्मों को खोलकर सरकार को करीब 200 करोड़ का चूना लगाया था। इस मामले में राज्य कर के अधिकारियों ने दो माह पहले कोतवाली, गलशहीद और बिलारी थाने सहित कुल छह केस दर्ज कराया था लेकिन जांच के दौरान कोई आरोपी नहीं पकड़ा गया। इसी कारण एसएसपी ने पूरे मामलों की जांच करने के लिए एसआईटी गठित कर दी है।
अपर आयुक्त ग्रेड-1 अशोक कुमार सिंह ने डाटा विश्लेषण के दौरान लकड़ी कारोबारियों की चोरी पकड़ी थी। इस मामले में विभाग ने जुलाई से बोगस फर्मों के खिलाफ अभियान शुरू किया। जांच में पाया गया कि मंडल की 128 बोगस फर्मों के माध्यम से लकड़ी की खरीद बिक्री की थी। इन फर्मों ने 1300 करोड़ का टर्न ओवर का मामला प्रकाश में आया। आशंका जताई गई कि बोगस फर्मों के माध्यम से करीब 200 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई है। राज्य कर विभाग की रिपोर्ट पर सीजीएसटी ने 95 फर्मों का पंजीयन निरस्त कर दिया।
जांच अधिकारियों ने पाया कि मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा और रामपुर से शुरू हुई लकड़ी की बोगस फर्मों ने अमरोहा, बिजनौर और उत्तराखंड तक खरीद फरोख्त की है। सरकार से पैसे हड़पने के लिए कारोबारियों ने फर्जी कागजातों और फर्जी बिलों का इस्तेमाल किया। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद शहर के कोतवाली, गलशहीद और कुंदरकी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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बोगस फर्मों से जुड़े 12 लोगों की सूची पुलिस को दी थी
- राज्य कर विभाग ने बोगस फर्माें से जुड़े 12 संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की थी। इस मामले में गोपनीय सूची पुलिस को भी सौंपी गई लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं किया। कोतवाली में दर्ज मुकदमे के अनुसार कारोबारी ने लकड़ी की एक फर्म के लिए कोतवाली क्षेत्र का पता दिया था। उसने पांच करोड़ का टर्नओवर किया था। जांच में कोतवाली क्षेत्र का पता फर्जी निकला था।