चांदनी और सदमा जैसी सुपरहिट फिल्म देकर अपने अभिनय का जादू चलाने वाली लेडी सुपरस्टार श्रीदेवी के असमय चले जाने से उनके प्रशंसकों को बड़ा सदमा लगा है। श्रीदेवी बॉलीवुड की ऐसी अदाकारा थीं, जिसने मात्र चार वर्ष की उम्र में अपनी मासूमियत और मुस्कान के साथ फिल्मों की दुनिया में दस्तक दी थी। सिर्फ अदाकारी ही नहीं, बल्कि उनके नृत्य के भी बहुत से चाहने वाले थे। बहुत सी अभिनेत्री कई-कई फिल्मों के बावजूद जगह नहीं बना पातीं, लेकिन वे अपनी एक झलक से ही फैंस के जेहन में बस जाती थीं। उनके चले जाने पर फैंस गमजदा हैं। फैंस का कहना है कि जो शून्य उन्होंने पैदा किया है, उसे कोई नहीं भर सकता।
सहारा चैनल पर बोनी कपूर प्रोडक्शन का सीरियल मालिनी अय्यर वर्ष 2008-09 में आता था। इसके कैमरामैन थे बशीर अली। उन्होंने मुझे सेट पर बुलाया था। वहां पर पूरे दिन मैंने पहली बार श्रीदेवी को देखा था। फिल्मों में वह जितनी चंचल और शोख थीं, व्यक्तिगत जिंदगी में उतनी ही गंभीर थीं। स्पॉट बाय, लाइट मैन, कैमरामैन के खाने पीने तक का ध्यान रखती थीं। सभी प्यार से उन्हें अम्मा कहते थे। उनके रूप में एक ऐसी अभिनेत्री हमारे बीच से चली गई, जिनका कोई स्थान नहीं ले सकता। सेट पर आने के बाद भी वह इतनी सरल होती थीं, लगता ही नहीं था कि वह इतनी बड़ी अभिनेत्री हैं।
ऋषिदेव शर्मा, सिनेमेटोग्राफर।
आम दर्शक के रूप में मुझे सदमा लगा है। वह मल्टी स्प्रिंग कलाकार थीं। कम समय में जितनी प्रसिद्घि उन्होंने हासिल की, बहुत कम लोगों को मिल पाती है। अभी उन्हें लंबी पारी खेलना था। पद्मश्री जैसा सम्मान उनकी काबिलियत बयां करता है। उनके चेहरे पर गजब का आकर्षण था। इंडस्ट्री में काम किया है तो और ज्यादा कमी महसूस कर रहा हूं। सुबह से जितनी फिल्मों की क्लिपिंग चल रही थी, मन कर रहा था कि सभी को देखता ही रहूं।
सुधाकर रंजन त्यागी, वरिष्ठ रंगमंचकर्मी।
उन दिनों मैं मुंबई में था। चांदनी के सेट पर पहली बार देखा था। जितनी बड़ी स्टार थीं, वास्तविक जिंदगी में उतनी ही सरल और सौम्य थीं। उनका व्यवहार देखकर मैं उनका भक्त हो गया था। चांदनी 50 से अधिक बार देखी है। नगीना, चालबाज, हिम्मतवाला, मिस्टर इंडिया मेरे दिल के करीब हैं। वह ऐसी अभिनेत्री थीं, जिनको चांदनी के जमाने में स्टेज शो करने के लिए दस-दस लाख रुपये ऑफर होते थे, लेकिन वह इन सब में दिलचस्पी नहीं लेती थीं। सही मायने में वह कलाकार ही नहीं, पूरा एक व्यक्तित्व थीं, जिनसे कोई भी प्रेरणा ले सकता है।
डॉ. पंकज दर्पण, रंगमंच कर्मी।
चालबाज में उनका किरदार मुझे बहुत पसंद है। कई बार इस फिल्म को देखा है। मिस्टर इंडिया में हवा-हवाई गाने पर उनका नृत्य और अदाकारी गजब की थी। उनके चेहरे की भाव-भंगिमा बहुत सुंदर थी। मंदिर शैली नृत्य उनके आने के बाद शुरू हुआ। श्री लक्ष्मी को कहा जाता है। यह साक्षात लक्ष्मी का रूप थीं। छोटी सी उम्र थी। अभी बॉलीवुड को उनकी जरूरत थी। इतने अच्छे कलाकार चले जाते हैं तो वह जगह भर नहीं पाती। संगीत, कला और फिल्म सभी क्षेत्रों में उनकी क्षति है।
बाल सुंदरी तिवारी, संगीतज्ञ।