त्योहारी सीजन है। ऐसे में मिठाइयाें का सेवन जरा संभलकर करें। यह अवश्य देख लें कि मिठाई कहीं एक्सपायर तो नहीं हो गई है। चूंकि सरकार ने भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दुकानदार मिठाइयों पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट का स्पष्ट उल्लेख अवश्य करेंगे पर मुरादाबाद में अभी बस लगभग 25 प्रतिशत दुकानदार ही इस व्यवस्था को लागू कर पाए हैं। जिम्मेदार महकमा भी अभी कार्रवाई करने के बजाय व्यापारियों को प्रोत्साहित करने में ही जुटा है। ऐसे में ग्राहकाें को खुद ही ध्यान देना होगा। कई मिठाई तो ऐसी हैं जो केवल एक या दो दिन में ही खराब हो जाती हैं।
त्योहारी सीजन है, सरकार ने लोगों के स्वास्थ्य को मिलावटखोरों से बचाये रखने के लिए तमाम दिशा निर्देश भी जारी किए हुए हैं। खासतौर पर मिठाइयों की गुणवत्ता बरकरार रहे इसके लिए सभी मिठाई विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश जारी हैं कि वह अपने यहां बनाई और बेची जाने वाली मिठाइयों पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट का स्पष्ट उल्लेख करेंगे । जांच के दौरान अगर एक्सपायरी डेट वाली मिठाई अथवा गुणवत्ता में कमी पाई जाएगी तो खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के अंतर्गत उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
मुरादाबाद शहर में मिठाई की छोटी बड़ी करीब 1500 दुकानें हैं। सरकार के इन आदेशों का यहां अनुपालन भी किया जाने लगा है लेकिन रफ्तार बहुत ही धीमी है। खुद अधिकारियों की मानें तो अभी महज 25 प्रतिशत तक ही इन आदेशों का अनुपालन हो रहा है । शहर में बड़ी मानी जाने वाली अधिकतर दुकानों के संचालक ही मुख्यत: इस आदेश का अनुपालन कर पाए हैं। इसके अलावा समय-समय पर लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल कई बार अधोमानक पाए गए और जांच में निरस्त होते रहे हैं । एक अक्तूबर से इन दुकानों पर यह नियम लागू किया जाना था लेकिन अभी 25 दिन बीत गए हैं और महज 25 से 30 प्रतिशत तक दुकानों पर ही यह है व्यवस्था अभी लागू हो पाई है।
मुरादाबाद मिष्ठान विक्रेता संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि सभी दुकानदार इस नियम को लागू करने में जुटे हुए हैं । देशी घी से बनी मिठाई बेचने वाली सभी बड़ी दुकानों पर यह नियम लागू कर दिया गया है मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट साफ.-साफ लिखी जा रही है। डालड़ा से बनी मिठाई बेचने वाले ओर अन्य दुकानों के संचालकों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है । दावा किया कि जल्दी ही इसे शत-प्रतिशत लागू करा दिया जाएगा।
मिठाइयों के विक्रेता तेजस्वी गुप्ता और शरद गोयल का भी कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से निर्देश मिलते ही सभी दुकानदारों ने इस व्यवस्था को लागू करने की तरफ कदम बढ़ाए है।इस पर तेजी से काम हो रहा है। हालांकि शत प्रतिशत तक लागू करने में अभी समय लगेगा। उनका कहना है कि सभी मिठाई विक्रेताओं ने शुद्धता और नियमों के पालन के लिए स्पष्ट रूप से सारे मानक पूरे करने का निर्णय पहले ही किया हुआ है।
बोले अधिकारी
खाद्य सुरक्षा विभाग के निरीक्षक शहाबुद्दीन ने बताया कि यह व्यवस्था लागू करने के लिए एक अक्टूबर से पहले ही सभी दुकानदारों को सूचित कर दिया गया था । विक्रेता संघ के माध्यम से भी अपील की गई है जगह-जगह जाकर चेकिंग अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि अभी तक अभियान के पहले चरण में दुकानदारों को इस नियम को लागू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अगले चरण में चेकिंग अभियान चलाया जाएगा और जहां कहीं भी बिना तारीख लिखी मिठाई पाई जाएगी संबंधित दुकानदार के खिलाफ खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कौन सी मिठाई कब तक होती है खाने लायक
एक दिन: कलाकंद, बटर स्कॉच कलाकंद, चॉकलेट कलाकंद।
दो दिन: दूध से बने खाद्य पदार्थ मिल्क बादाम, रसगुल्ला, रबड़ी, रसमलाई, शाही टोस्ट, रसकाटा, खीर मोहन आदि।
चार दिन: मिल्क केक, मथुरा पेड़ा, मलाई घेवर, तिलबुग्गा, केसर् कोकोनट लड्डू, मोतीचूर मोदक, खोया बादाम, फ्रूट केक, पेड़ा, प्लेन बर्फी, मिल्क बर्फी, सफेद पेड़ा, बूंदी लड्डू, खोया कोकोनट बर्फी, मोती पाक आदि।
सात दिन: काजू कतली, ड्राई फ्रूट लड्डू, मूंग बर्फी, आटे का लड़डू, काजू केसर बर्फी, काजू बेसन की बर्फी,केसर बिग मलाई, स्माल केसर घेवर, काजू रोल, बालूशाही और चंद्रकला आदि।
30 दिन: सोहन पापड़ी, बतीसा, आटे, बेसन और चने आदि के लड्डू, चने की बर्फी, अंजीर खजूर बर्फी, कराची हलवा, सोहन हलवा, गजक चक्की आदि।
क्या है कार्रवाई का प्रावधान
विभाग के अधिकारी पहले दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन कराने के लिए प्रेरित करते हैं। अनुपालन नहीं करने पर चालान करने का प्रावधान है इसके अतिरिक्त गुणवत्ता में खराबी की शिकायत मिलने पर सैंपल भरा जाता है जिसे परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है। सैंपल अगर फेल पाया जाता है तो कोर्ट में चालान भेजा जाता है। प्रमाणित होने पर छह माह से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त मिस ब्रांड और अधोमानक पाए जाने पर अपर जिलाधिकारी की अदालत में मुकदमा चलाया जाता है। इसमें तीन से लेकर पांच लाख रुपए तक का प्रावधान है।