मशीनें शिल्पकार के अहसास को नहीं उकेर सकतीं
मुरादाबाद। आज के दौर में जहां युवा कंप्यूटर और 3 -डी डिजाइनिंग की ओर भाग रहे हैं, वहीं 76 वर्षीय चिरंजीलाल का मानना है कि उच्च कोटि की कला सिर्फ हाथों की मेहनत से ही जन्म लेती है। उनका कहना है कि आज की पीढ़ी शॉर्टकट ढूंढती है, लेकिन पद्मश्री जैसे सर्वोच्च मुकाम तक पहुंचने के लिए तपना पड़ता है। मशीनें कभी उस अहसास को नहीं उकेर सकतीं जो एक शिल्पकार की उंगलियां पीतल पर उकेरती हैं।
सब्जी के नए बीज तैयार करने, बीजों का संरक्षण और उन्नत खेती के नए प्रयोग करने के लिए वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश सरकार ने बिलारी ब्लॉक के समाथल गांव निवासी किसान रघुपत सिंह को कृषि पंडित का खिताब दिया था। इसके बाद में विशेष प्रजाति की लौकी, लोबिया, अरबी, मिर्च समेत विभिन्न सब्जियां उगाने वाले रघुपत सिंह को वर्ष 2016 में वाराणसी सब्जी अनुसंधान केंद्र से गोल्ड मेडल मिलने समेत राष्ट्रीय स्तर के अनेक पुरस्कार मिले।
मरणोपरांत पद्मश्री से सम्मानित होने वाले समाथल के किसान रघुपत सिंह की पत्नी प्रेमवती को मंगलवार शाम दिल्ली में राष्ट्रपति ने पद्मश्री अवाॅर्ड साैंपा गया। इसकी जानकारी मिलने पर क्षेत्र में खुशी की लहर दाैड़ गई। किसान रघुपत सिंह के बेटे सुरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि उनके दिवंगत पिता रघुपत सिंह को सरकार की ओर से दिया गया पद्मश्री सम्मान शाम को उनकी माता प्रेमवती को साैंपा गया है।
इस दौरान वह भी अपनी माता के साथ रहे। एक जुलाई 2025 को रघुपत सिंह अपने गांव समाथल में बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। बीती 25 जनवरी को केंद्र सरकार की ओर से पद्मश्री के लिए मरणोपरांत रघुपत सिंह को भी चुना गया। केंद्र सरकार के बुलावे पर मंगलवार को रघुपत सिंह की पत्नी प्रेमवती और उनका बड़ा बेटा सुरेंद्रपाल दिल्ली पहुंचे। इस संबंध में आयोजित समारोह में अपने पति को मिलने वाला पद्मश्री का सम्मान प्रेमवती को साैंपा गया। प्रेमवती को पदमश्री से सम्मानित किए जाने की खबर मिलने पर समाथल के ग्रामीणों ने खुशी जताई।