शहर को हिला देने वाले डा. शैली हत्याकांड का खुलासा करने में पुलिस को डेढ़ साल बाद भी सफलता नहीं मिल पाई है। दो दिन पहले हरिद्वार गई पुलिस टीम भी खाली हाथ वापस लौट आई। खुलासे में जुटी पुलिस को पता चला था कि हरिद्वार में डा. शैली ने किसी जमीन का सौदा किया था। इसके बाद टीम हरिद्वार गई थी।
लेकिन वहां न तो जमीन का सौदा कराने वाला मिला और न ही जमीन का मालिक। अगले दिन पुलिस डा. शैली के रिश्तेदार के घर रुड़की पहुंची। लेकिन रिश्तेदार ने पुलिस से बात करने से इंकार कर दिया। पंद्रह मई 2014 की रात जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस डा. शैली, उनके पति डा. ओम, उनकी ननद डा. रश्मि और पांच साल की पोती गिन्नी की हत्या कर दी थीं।
खून से लथपथ चारों की लाशें जिगर कालोनी स्थित उनके आवास में मिलीं थीं। इस सनसनीखेज वारदात के बाद अफसरों के तबादले कर दिए गए थे। नये अफसरों को जिले की कमान दी गई। लेकिन डा. शैली हत्याकांड का खुलासा करने में सभी अफसर नाकाम रहे। डा. शैली के बेटे तत्कालीन डीजीपी से लखनऊ में मुलाकात की थी।
उन्होंने हत्याकांड के खुलासे की मांग की। डीजीपी के आदेश पर ही एसटीएफ लगाई थी। तीन दिन एसटीएफ शहर में रही। लोकल पुलिस को साथ लेकर घटनास्थल का मुआयना किया। इसके बाद कई संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की। जिला अस्पताल पहुंचकर कर्मचारी और डाक्टरों से भी पूछताछ की थी। लेकिन रिजल्ट जीरो ही रहा था।
अब कुछ दिन पहले पुलिस को एक लाइन मिली थी। पता चला कि डा. शैली ने घटना से कुछ दिन पहले ही हरिद्वार में किसी जमीन का सौदा किया था। शायद वह हरिद्वार में अस्पताल खोलना चाह रही थीं। ये लाइन मिली तो पुलिस ने हरिद्वार पहुंचने में देर नहीं की।
टीम दो दिन तक हरिद्वार में रही। जहां जहां जमीन के सौदा किए जाने की बात सामने आई थी। टीम ने वहां एक एक व्यक्ति ने बात की। लेकिन पुलिस को कोई सुराग नहीं मिल पाया। इसके बाद पुलिस वापस लौट आई।