मुरादाबाद। पढ़ने की लगन और जज्बा हो तो मुश्किलें आसान हो जाती हैं। भोला सिंह मिलक जूनियर हाईस्कूल की कक्षा 7वीं की 13 साल की छात्रा शाहिस्ता ने इसे साबित किया है। आर्थिक तंगी और समाज की रूढिवादिता ने परिजनों ने उसकी पढ़ाई बंद कर दी। शाहिस्ता ने परिवार से बगावत कर छह माह घर में बैठने के बाद न केवल स्कूल में दोबारा पढ़ाई शुरू की, बल्कि गांव की कई छात्राओं का दाखिला करवाया। शाहिस्ता ने मीना मंच में बतौर पावर एंजिल बालिका शिक्षा एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को सार्थक किया है। प्रदेश सरकार ने शाहिस्ता को उसके सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया है।
भोला सिंह मिलक की शाहिस्ता बेहद गरीब परिवार से है। चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है। शाहिस्ता के पिता पंजाब में मजदूरी करते हैं। शाहिस्ता ने गांव के प्राथमिक स्कूल से 5वीं तक पढ़ाई की। पढ़ाई में होशियार होने के बाद भी परिवार के लोगों ने छठी में उसका दाखिला करने से मना कर दिया। घर के कामकाज में मां का हाथ बंटाने का दबाव बनाया। शाहिस्ता ने जिद कर कक्षा छह में जूनियर हाईस्कूल में दाखिला लिया। पढ़ाई में होशियार और खेलकूद में अव्वल होने से शाहिस्ता को मीना मंच की पावर एंजिल का दायित्व सौंपा। परिवार ने अचानक कक्षा छह में उसकी पढ़ाई बंद करवा दी। छह माह शाहिस्ता घर में बैठी रही और स्कूल जाने की जिद करने लगी। 2019 में शाहिस्ता घर में बगावत कर स्कूल पहुंची। तब तक सत्र खत्म हो चुका था। स्कूल के शिक्षकों ने शाहिस्ता की परीक्षा ली और उसने परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया।
शिक्षिका अफसाना खातुन ने बताया कि शाहिस्ता को कक्षा 7वीं में दाखिला मिल गया। गांव में जो लड़कियां स्कूल नहीं जाती थी, शाहिस्ता उनके घर गई और परिवार के लोगों को समझाया। शाहिस्ता की पहल पर कई अभिभावकों ने लड़कियों का स्कूल में दाखिला करवाया। बालिका शिक्षा के लिए सराहनीय कार्य के लिए शाहिस्ता का मुरादाबाद जिला ही नहीं मंडल में चयन हुआ। गुरुवार को लखनऊ में शाहिस्ता को खंड शिक्षा अधिकारी डा. मीना मनराल, एसआरजी सचिन शुक्ला, ऋुति त्यागी और संजय विशाल नेगी की मौजूदगी में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुरस्कृत किया।