शबनम और सलीम का डेथ वारंट निरस्त करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का आदेश शुक्रवार को जिला जेल पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज अमरोहा की ओर से जारी शनबम और सलीम के डेथ वारंट को दस दिन पहले निरस्त कर दिया था। अब बावनखेड़ी के दोषियों को नए सिरे से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करना होगा।
अमरोहा के गांव बावनखेड़ी में 14/15 अप्रैल 2008 की रात को शिक्षामित्र शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने मां पिता समेत सात परिजनों की कुल्हाड़ी से गर्दनें काटकर नृशंस हत्या कर दी थी। इस मामले में शबनम और सलीम को दोषी ठहराते हुए सेशन कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने भी दोनों की फांसी की सजा को कनफर्म कर दिया था। इसके बाद 15 मई 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने भी दोनों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी। सुप्रीम कोर्ट से भी फांसी की सजा बरकरार रहने के बाद अमरोहा जिला जज ने शबनम और सलीम के डेथ वारंट जारी कर दिए थे।
शबनम और सलीम ने अपने डेथ वारंट को निरस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिस पर सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के डेथ वारंट निरस्त कर दिए थे। सर्वोच्च अदालत ने आदेश में कहा था कि फांसी की सजा में अंतिम विकल्प तक का इस्तेमाल करने का अधिकार दोषियों के पास है लिहाजा रिवीजन, क्यूरेटिव और दया याचिका का विकल्प इस्तेमाल किए जाने तक दोनों को फांसी नहीं दी जा सकती है।