मुरादाबाद। धान खरीद में 2.23 करोड़ रुपये के गबन के मामले में शासन स्तर से कार्रवाई की गई है। इस मामले में एसएफसी के एमडी ने जिला प्रबंधक और केंद्र प्रभारी को निलंबित कर दिया है। एमडी की इस कार्रवाई से यहां हड़कंप मच गया है।
एसएफसी के डिलारी स्थित धान खरीद केंद्र पर खरीदा गया करीब 2.23 करोड़ रुपये का धान क्रय केंद्र प्रभारी और दो राइस मिलर्स के बीच गायब हो गया था। यह मामला तब खुला था जब राइस मिल से एफसीआई को चावल नहीं पहुंचा। पूछताछ में मिलर्स ने बताया कि केंद्र प्रभारी ने उसका यूजर नेम और पासवर्ड हैक कर ऑनलाइन धान की डिलीवरी दिखा दी है, जबकि वास्तव में उन्हें धान प्राप्त नहीं हुआ। इसकी जानकारी हालांकि विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों को एक माह पहले ही हो गई थी, लेकिन इसे दबाए बैठे रहे। एमडी ओपी वर्मा ने लखनऊ में अधिकारियों को बुलाकर छह मार्च को जब समीक्षा की तब गबन का मामला सामने आ सका। एमडी ने इसकी जानकारी प्रमुख सचिव को दी तो शासन से लेकर जिले तक में हड़कंप मचा।
एमडी खुद यहां पहुंचे और तब जाकर 10 मार्च की रात इस मामले में डिप्टी आरएमओ की तहरीर पर डिलारी पुलिस ने एसएफसी जिला प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव, क्रय केंद्र प्रभारी रेखा सिंह व दो राइस मिलर्स समेत 12 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इस मामले की पुलिस पिछले तीन दिन से पड़ताल कर रही है। इधर शासन स्तर पर यह मामला पहले ही गंभीरता से लिया जा चुका है। शुक्रवार शाम उत्तर प्रदेश राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ओपी वर्मा ने डिलारी की क्रय केंद्र प्रभारी रेखा सिंह और एसएफसी के जिला प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव को प्रथम दृष्ट्या दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन्होंने एसएफसी के जिला प्रबंधक की विभागीय जांच वित्त नियंत्रक लखनऊ विनोद कुमार को तथा केंद्र प्रभारी रेखा सिंह की जांच जिला प्रबंधक अलीगढ़ सुरेंद्र तिवारी को सौंपी है। उन्होंने दोनों अधिकारियों से यह जांच रिपोर्ट एक माह के भीतर देने को कहा है।