मुरादाबाद। शहर का सबसे तेजी से बढ़ता इलाका लाइनपार आज भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में उपेक्षा का शिकार है। करीब चार लाख की आबादी वाले इस पूरे क्षेत्र में एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है, जहां मरीजों को भर्ती कर इलाज मिल सके। सात वार्डों में फैले इस इलाके के लोगों को गंभीर बीमारी, प्रसव, दुर्घटना या इमरजेंसी की स्थिति में जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इलाज के लिए उन्हें रोज जाम और लंबी दूरी पार कर शहर के दूसरे हिस्से में जाना पड़ता है। लाइनपार में वार्ड-4, वार्ड-18, वार्ड-12, वार्ड-37, वार्ड-30, वार्ड-9 और वार्ड-16 के अंतर्गत मझोला, कुंदनपुर, जयंतीपुर, ढक्का, एकता कॉलोनी, रामेश्वर कॉलोनी, मानसरोवर कॉलोनी, सूर्यनगर, विकास नगर, गायत्री नगर समेत दर्जनों कॉलोनियां आती हैं। पिछले एक दशक में यहां तेजी से आबादी बढ़ी, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं उसी अनुपात में विकसित नहीं हुईं। पूरे इलाके में मझोला, चाऊ की बस्ती, शिवपुरी और ढक्का समेत चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं, लेकिन इनमें से किसी पर भी मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं है। अधिकांश केंद्रों पर सामान्य बुखार, सर्दी-खांसी और दर्द की दवाएं ही उपलब्ध रहती हैं। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ऑक्सीजन बेड, प्रसव कक्ष, आपातकालीन उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टर जैसी सुविधाएं नहीं हैं। रात में किसी मरीज की तबीयत बिगड़ जाए तो परिजनों के सामने निजी अस्पताल या जिला अस्पताल तक पहुंचने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। कुंदनपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लाइनपार की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य इकाई माना जाता है, लेकिन यह भी केवल ओपीडी तक सीमित है। यहां न तो भर्ती की सुविधा है और न ही 24 घंटे चिकित्सा सेवा। कई बार मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। लगातार मांग के बावजूद लाइनपार में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या 100 बेड के सरकारी अस्पताल की योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी।
लोगों के कोट्स (फोटो)
लाइनपार की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन आज भी एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है। मामूली इलाज तो किसी तरह हो जाता है, लेकिन मरीज को भर्ती कराने की जरूरत पड़ते ही जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इमरजेंसी में सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
- पीएस उपाध्याय
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है। रात में तबीयत बिगड़ जाए तो निजी अस्पताल ही सहारा बचता है। लाइनपार जैसे बड़े इलाके में भर्ती सुविधा वाला सरकारी अस्पताल अब जरूरी हो गया है।
- शिव नारायण पूठिया
चार लाख की आबादी वाले क्षेत्र में केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है। जांच, एक्स-रे और भर्ती जैसी सुविधाएं नहीं हैं। लोगों को इलाज के लिए रोज कपूर कंपनी या लोकोशेड पुल करना पड़ता है, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।
- नरेश कुमार
कुंदनपुर पीएचसी पर सिर्फ सामान्य इलाज मिलता है। गंभीर मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है। अगर यहीं अस्पताल बन जाए तो लाइनपार के हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी और मरीजों का समय भी बचेगा।
- कन्हैया गोस्वामी
बरसात में जलभराव होने पर मरीज को अस्पताल तक ले जाना और मुश्किल हो जाता है। एंबुलेंस आने में भी समय लगता है। इतने बड़े इलाके में 24 घंटे सेवा देने वाला सरकारी अस्पताल होना बेहद जरूरी है।
- अमित शर्मा
सरकार ने लाइनपार में सड़कें और कॉलोनियां तो विकसित की हैं, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं पीछे रह गई हैं। हर छोटी-बड़ी बीमारी के लिए जिला अस्पताल या निजी अस्पताल जाना पड़ता है। अब यहां आधुनिक सरकारी अस्पताल बनाया जाना चाहिए।
- तरुण शर्मा
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वर्जन
ढक्का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चार बेड की व्यवस्था की गई है। अभी स्टाफ कम है। जल्द ही यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों को तैनात करने की योजना है। लोगों को भर्ती की सुविधा भी मिलेगी।
- डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ