फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाल मजदूर : सात जिलों के सात बड़े स्टेशन किए पार, एसपी जीआरपी की गंभीरता से पकड़े गए आरोपी

Fri, 02 Jul 2021 02:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

  • 30 जून की देर रात 12 बजकर तीन मिनट पर मिली सूचना, तब लखनऊ के पास थी ट्रेन
विज्ञापन
रेलवे स्टेशन पर आरोपियों से पूछताछ करती जीआरपी... - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हैरत की बात है कि सूचना प्रसारित होने के बाद भी ट्रेन (02407) कर्मभूमि एक्सप्रेस ने सात जिलों के सात बड़े स्टेशन पार किए, लेकिन कोई जिम्मेदार नहीं चेता। वहीं एसपी जीआरपी अपर्णा गुप्ता ने ई-मेल को बहुत गंभीरता से लिया और मुरादाबाद, रामपुर, चंदौसी और बरेली के थानाध्यक्षों को अलर्ट किया। एक घंटे के भीतर सारी योजना तैयार कर ली गई और सुबह चार बजे तक चारों जिलों के थानाध्यक्ष मुरादाबाद आ गए। इसी मुस्तैदी के फलस्वरूप बच्चों को मजदूरी के लिए ले जाने वाले आरोपी पकड़े गए।

विज्ञापन


 बाल कल्याण संगठन के प्रदेश समन्वयक ने 30 जून को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर कटिहार रेलवे स्टेशन पर बच्चों को ट्रेन में ले जाते देखा था। जब उन्होंने देर रात 12 बजकर तीन मिनट पर सूचना जीआरपी को भेजी तो ट्रेन लखनऊ से पीछे थी। इसके बाद तड़के तीन बजकर पांच मिनट पर ट्रेन सीतापुर में रुकी। वहां कुछ बच्चों को उतारा गया, लेकिन लखनऊ मंडल की जीआरपी ने कोई एक्शन नहीं लिया।

 यही नहीं गोरखपुर, लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, हरदोई, बरेली, रामपुर तक ट्रेन ने 7 बड़े स्टेशन पार कर लिए। इस बीच जीआरपी मुरादाबाद ने भी अपनी तैयारी पूरी कर ली। चार बजे थानाध्यक्षों के मुरादाबाद पहुंचने के बाद छह टीमें गठित हुईं। सीओ जीआरपी देवीदयाल भी सादी वर्दी में ऑपरेशन का नेतृत्व करने पहुंचे। सुबह सात बजे तक स्टेशन अधीक्षक को पत्र सौंपकर ट्रेन को मुरादाबाद स्टेशन पर ज्यादा समय तक रोकने की अनुमति ली गई। 
विज्ञापन


 इसके बाद जैसे ही ट्रेन 08.40 बजे मुरादाबाद पहुंची जीआरपी की छह टीमों ने ट्रेन को घेर लिया। सभी कोचों में चेक किया गया तो सूचना सही साबित हुई। जीआरपी ने तीनों आरोपियों समेत कुल 82 लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में कार्रवाई के आधार पर 41 व्यस्कों को छोड़ दिया गया। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया गया और 38 नाबालिग बच्चों को चाइल्ड लाइन के साथ मिलकर संरक्षण में रखा गया है।

बच्चों को घुमाने ले जाने का बहाना बनाते रहे आरोपी
 जीआरपी के बार-बार पूछने पर भी पकड़े गए तीनों आरोपी बच्चों को घुमाने ले जाने का बहाना बनाते रहे। वहीं, बच्चों का कहना था कि वे उन्हें मजदूरी के लिए पंजाब लेकर जा रहे हैं। इनमें से कई बच्चों को आरोपी व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। तीनों आरोपियों में से एक बिहार, एक पश्चिम बंगाल और एक पंजाब का निवासी है। जीआरपी को शक है कि पंजाब में फैक्टरियों में जगह खाली होने पर पंजाब का आरोपी बिहार और पश्चिम बंगाल में संपर्क करता था। वहां से जरूरतमंद बच्चों को नौकरी का लालच देकर पंजाब पहुंचा दिया जाता था। हालांकि इस मामले में जीआरपी तहकीकात कर रही है।

पांच से आठ हजार रुपये की नौकरी का था लालच
पकड़े गए तीनों आरोपी जरूरतमंद बच्चों को नौकरी पर पांच से आठ हजार रुपये प्रतिमाह देने की बात पर ले जा रहे थे। बरामद कि गए बच्चों में कुछ आपस में रिश्तेदार भी हैं। जबकि सात बच्चों के बारे में आरोपी कोई प्रमाण नहीं दे पाए हैं। जीआरपी का कहना है कि छोड़े गए 41 व्यस्कों में से इन कुछ बच्चों को अपना रिश्तेदार बता रहे हैं। लेकिन जीआरपी ने उन्हें बच्चे नहीं सौंपे हैं। एसपी जीआरपी अपर्णा गुप्ता का कहना है कि बच्चों के माता-पिता के आने पर ही उन्हें सुपुर्द किया जाएगा अन्यथा जीरपी स्वयं उन्हें घर तक छोड़ेगी।

आरोपियों पर इन धाराओं के तहत होगी कार्रवाई
1- आईपीसी 1860 की धारा 370 किसी भी व्यक्ति, मानव या बालक को खरीदने या बेचने में कम से कम दस साल की सजा, अधिक से अधिक आजीवन कारावास एवं आर्थिक दंड। यह गैर जमानती अपराध है।
2- आईपीसी 1860 की धारा 374  किसी भी कार्य के लिए दूसरे को विवश करना। इसके लिए एक या उससे अधिक वर्ष का कारावास साथ ही अर्थ दंड (न्यायालय के विवेकानुसार)
3- बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम) 1986 की धारा 14(3)(डी) बालकों के कार्य की परिसीमा एवं कार्यों की अनुमति। इसमें सजा तीन माह से कम नहीं हो सकती एवं जुर्माना दस से बीस हजार तक है।
4- किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 बाल विवाह से सबंधित है, जिसके अंतर्गत संरक्षक को आरोपी बनाया जा सकता है। इसमें सजा दो वर्ष है।
5- किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 79 के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी कमाई बढ़ाने के लिए बालकों का प्रयोग करता है (जैसे नट का तमाशा) तो वह अपराध की श्रेणी में आएगा। इसमें सजा पांच वर्ष एवं जुर्माना एक लाख तक हो सकता है। यह गैर जमानती है।
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें