मुरादाबाद। प्राधिकरण की सौ से अधिक बेशकीमती संपत्तियों का आवंटन निरस्त करने के बाद उन्हें आधे दामों में बेचने के खेल में एमडीए के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों की गर्दनें फंस रही हैं। पिछले दरवाजे से बेची गई इन संपत्तियों की वजह से एमडीए को कई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मामला उजागर होने के बाद कमिश्नर ने प्राधिकरण से इसका रिकार्ड तलब किया है। अब इस बात की जांच होगी कि निरस्ती की गई सभी संपत्तियां 2016 में किस दाम पर बिकी थीं और 2018 में उन्हें कितने दामों पर बेच गया।
डिफाल्टर आवंटियों पर सख्ती के नाम पर एमडीए अधिकारियों ने यह खेल खेला था। प्राधिकरण की कांशीराम नगर और नया मुरादाबाद योजना में वर्ष 2018 में 100 से अधिक भूखंडों का आवंटन निरस्त कर दिया गया था। 2018 में ही कुछ समय बाद इन भूखंडों को पिछले दरवाजे से पहले की तुलना में आधे दामों पर बेच दिया गया था। प्राधिकरण में हुए आवंटन घोटाले का खुलासा होने के बाद से अधिकारी इस पर पर्दा डालने में जुटे हैं। घोटाले में एमडीए के कई पूर्व और मौजूदा अधिकारियों की गर्दनें फंसता देख प्राधिकरण प्रशासन ने इस पर चुप्पी साध ली है। इस बीच मंडलायुक्त यशवंत राव ने भूखंडों के निरस्तीकरण से लेकर उनके दोबारा आवंटन तक का पूरा रिकार्ड एमडीए से तलब कर लिया है। नियम के मुताबिक पूर्व में कोई संपत्ति जितने दामों पर बिक चुकी है उसे उससे कम रेट पर नहीं बेचा जा सकता। लेकिन प्राधिकरण अधिकारियों ने इन नियमों को ताक पर रखकर एमडीए की बेशकीमती संपत्तियों को सस्ती दरों पर बेच डाला। एमडीए के तत्कालीन संपत्ति अधिकारी से लेकर आवंटन प्रक्रिया में शामिल बाकी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कमिश्नर यशवंत राव का कहना है कि जो भी इसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।