मुरादाबाद। हाईकोर्ट से यथास्थिति के आदेश के बावजूद विवादित भूमि पर बनी चहारदीवारी गिरवाने की शिकायत होने पर एसडीएम ने मातहत से जांच करा खुद को क्लीनचिट दिलवा दी। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी। प्रशासनिक अमले में एसडीएम के खुद को क्लीनचिट दिलाने के मामले की चर्चा हो रही है।
मामला नई बनी ग्राम पंचायत हट हट का है। जिसमें सामुदायिक शौचालय और पंचायत भवन का निर्माण कार्य किया जाना है। गांव में कोई उपयुक्त भूमि ना मिलने के कारण गांव के ही रहने वाले मुंशी राजा ने अपनी भूमि दान की। जिस पर राजनीतिक प्रतिद्वंदता के कारण गांव के ही कल्लूू आदि ने पहले तो सिविल न्यायालय में वाद दायर किया, लेकिन वहां से स्टे नहीं मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के लिए यथास्थिति का आदेश पारित कर दिया। आरोप है कि हाईकोर्ट से यथास्थिति का आदेश होने के बावजूद एसडीएम सदर प्रशांत तिवारी ने पांच मई 2022 को गांव में जाकर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय की सरकारी धन से कराई गई चहारदीवारी को जेसीबी से गिरवा दिया। इस पर हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना को लेकर ग्राम प्रधान अफसाना तैयब ने कमिश्नर और डीएम से शिकायत की। उसकी जांच आई तो एसडीएम सदर ने तहसीलदार सदर से ही मामले की जांच करा ली। मातहत ने अधिकारी को निर्दोष बताते हुए जांच रिपोर्ट पेश कर दी। इसके बाद एसडीएम सदर प्रशांत तिवारी ने तहसीलदार की जांच आख्या के आधार पर ग्राम प्रधान की शिकायत को निराधार बता दिया। साथ ही यह भी कहा कि वहां किसी भी प्रकार की चहारदीवारी का निर्माण ही नहीं किया गया। यही रिपोर्ट एडीएम प्रशासन को भेज दी है। जिसके बाद से यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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एसडीएम के खिलाफ पूर्व में लेखपाल भी कर चुका जांच
मुरादाबाद। एसडीएम सदर द्वारा अपने कार्यालय से एक अधिवक्ता को बाहर निकाले जाने के मामले की आईजीआरएस पर जून 2021 में की गई थी। इस मामले की जांच एक लेखपाल ने करके अपनी आख्या लगाकर भेजने के साथ शिकायत को निस्तारित दिखा दिया था। यह मामला भी चर्चा में रहा था।