मुरादाबाद। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को लेकर भले ही लोगों में जागरूकता की कमी हो, लेकिन सरकारी इंतजाम में भी कुछ ऐसा नहीं है कि मरीज का इलाज हो सके। जिले में कैंसर की जांच की बात तो छोड़िए यहां स्क्रीनिंग तक का भी इंतजाम नहीं है। यहां तैनात चिकित्सक अगस्त 2020 में रिटायर हो गए थे, तब से नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) डॉक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। एनसीडी क्लीनिक शुगर, बीपी के मरीजों तक सिमट कर रह गई है। ऐसे में मजबूरी में कैंसर के मरीजों को दिल्ली-मेरठ की दौड़ लगानी पड़ती है।
जीवनशैली में बदलाव, शराब, तंबाकू के सेवन से कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के लिए मरीजों को बड़े शहराें की दौड़ नहीं लगानी पड़े। इसके लिए मार्च 2015 में एनएचएम के तहत जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालाें में नेशनल प्रोग्राम फार प्रेवेेंशन एंड कंट्रोल आफ कैंसर, डायबिटीज, कार्डियो वैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक की शुरुआत की गई। इसके तहत जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक की स्थापना की गई थी।
इसका मकसद कैंसर, डायबिटीज, कार्डियो, बीपी, हाईपरटेंशन संबंधित बीमारियों का इलाज किया सके। 2020 में क्लीनिक में तैनात चिकित्सक रिटायर हो गए थे, इनके बाद से अभी तक स्थायी डॉक्टर की तैनाती नहीं हो सकी है। इसके चलते यहां कैंसर के मरीजों की न तो स्क्रीनिंग हो पाती है और न ही जांच। मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली और मेरठ के अस्पतालों में चक्कर लगाने पड़ते हैं। एनसीडी क्लीनिक का लाभ सिर्फ शुगर, बीपी, हाईपरटेंशन के मरीजों तक पहुंच रहा है।
- एनसीडी क्लीनिक में डॉक्टर की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है। आचार संहिता लगने के चलते तैनाती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। आचार संहिता हटने के बाद डॉक्टर की तैनाती कर दी जाएगी। - डॉ. एमसी गर्ग, सीएमओ
चार साल एपिडेमियोलॉजिस्ट ने चलाया क्लीनिक
मुरादाबाद। एनसीडी क्लीनिक को चार साल एपिडेमियोलॉजिस्ट ने चलाया। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने एनसीडी क्लीनिक में पार्ट टाइमर के तौर पर ज्वाइनिंग की थी। दो साल पहले उनकी यहां भी सेवाएं पूरी हो गईं। उनकी तैनाती के दौरान आने वाले संभावित कैंसर के मरीजों को जिला अस्पताल के फिजीशियन और ईएनटी के पास रेफर किया जाता था।
कैंसर की जंग में वैक्सीन की काम करती है जागरूकता
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यवीर चौहान का कहना है कि कैंसर की जंग में जागरूकता एक वैक्सीन का काम करती है। अगर मरीज जागरूक है तो बीमारी का समय पता चल सकता है। नियमित स्क्रीनिंग से कैंसर के कई मामलों का पता शुरुआती अवस्था में लगाया जा सकता है। महिलाओं में आधे से अधिक कैंसर गर्भाशय, ग्रीवा और स्तन कैंसर के होते हैं। इसका पता मैमोग्राफी एवं पीएपी स्मीयर परीक्षणों के जरिए लगाया जा का है। जल्दी पता चलने की स्थिति में 90 फीसदी कैंसर ठीक हो सकते हैं।
कैंसर के लक्षण
- त्वचा के नीचे गांठ महसूस होना
- शरीर का वजन अचानक से कम या ज्यादा होना
- त्वचा पर जल्दी निशान पड़ जाना
- निगलने में कठिनाई होना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- घाव का जल्दी ठीक न होना
- थकान और कमजोरी महसूस होना
- पेट में लगातार दर्द होना
कैंसर से बचाव के उपाय
- धूम्रपान न करें
- शराब का सेवन न करें
- आहार में अधिक वसा न लें
- नियमित रूप से व्यायाम करें
- शरीर का सामान्य वजन बनाए रखें
- अधिक परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लें
दो साल से महिला संपूर्ण क्लीनिक बंद
महिला अस्पताल में महिला संपूर्ण क्लीनिक की स्थापना की गई थी। इसमें महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग की जाती थी। लेकिन कोरोना संक्रमण में दो साल से महिला संपूर्ण क्लीनिक बंद है।
बायोप्सी से डरे नहीं जरूर कराएं
डॉक्टरों के मुताबिक गांठ मिलने पर मरीजों को बायोप्सी कराने की सलाह दी जाती है, लेकिन मरीज बायोप्सी कराने से डरता है। जबकि हर गांठ कैंसर नहीं होता है। ऐसे में अनदेखी करने पर मर्ज बढ़ता जाता है। जांच नहीं होने पर मरीज आखिरी स्टेज में पहुंच जाता है।