बिलारी। गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों और गन्ना विभाग के अधिकारियों ने बुधवार दोपहर क्षेत्र के मढवा गांव के जंगल में पहुंचकर किसानों की गन्ने की फसल में लग रहे रोगों की जांच की और गन्ने की प्रजातियों का निरीक्षण किया।
सहकारी गन्ना विकास समिति बिलारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार दोपहर उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के वरिष्ठ प्रजनन वैज्ञानिक डा.अरविंद कुमार और पादप रोग वैज्ञानिक डा. सुजीत प्रताप सिंह, बिलारी चीनी मिल क्षेत्र में आने वाले मंढवा, तिमनपुर, भारतल, मदापुर और अढौला माफी आदि ग्रामों में पहुंचे। वैज्ञानिकों के दल के पहुंचने की सूचना पर जिला गन्ना अधिकारी रामकिशन, गन्ना विकास परिषद बिलारी के ज्येष्ठ निरीक्षक संजीव कुमार, लक्ष्मी जी चीनी मिल बिलारी के उपाध्यक्ष सुभाष खोखर, चीनी मिल के महाप्रबंधक गन्ना गिरीश कुमार सिंह आदि भी पहुंच गए। इस दौरान आसपास के ग्रामों के किसानों की भीड़ लग गई।
ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक ने बताया कि शोध संस्थान के वैज्ञानिकों के निरीक्षण के दौरान मंढवा निवासी कृषक संजीव कुमार की गन्ने की प्रजाति 16202 में पोक्का बोइंग रोग के लक्षण दिखाई दिए जबकि दूसरे खेत में खड़ी गन्ना प्रजाति 18231 में किसी रोग का प्रकोप नहीं मिला। किसान सुधीर सिंह और सचिन सिंह के खेत में खड़ी गन्ने की जिस प्रजाति को किसानों द्वारा 05009 बताया जा रहा था वह प्रजाति जांच में 05011 पाई गई। क्षेत्र के खनूपुरा गांव में किसान रामसिंह के खेत में खड़ी गन्ने की फसल के निरीक्षण के दौरान गन्ना प्रजाति 0118 में ऊपर की पत्ती में थ्रप्सि का प्रकोप होने की वजह से सूखी पाई गई। संबंधित किसान को क्लोरो पाइरीफॉस का छिड़काव करने की सलाह दी गई। वैज्ञानिकों और गन्ना विभाग के अधिकारियों ने इस दौरान नुक्कड़ गोष्ठियां कर किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाले रोगों की पहचान और उन पर नियंत्रण करने की जानकारी भी दी गई।