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Sambhal Violance: साल 1978, 1986 और 1992 के दंगे की भी आयोग को दी जानकारी, बयान दर्ज कराने पहुंचे लोग

Wed, 22 Jan 2025 03:07 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

Sambhal Violence News: संभल बवाल मामले में गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने संभल में स्थित लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में 51 लोगों से लिखित बयान लिए हैं। करीब सात घंटे तक आयोग के सदस्य संभल में रहे। 20 से 25 लोगों से मौखिक भी जानकारी ली गई।
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सात घंटे तक संभल में रहा न्यायिक आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sambhal Violence Investigation: न्यायिक जांच आयोग के सामने जो लोग अपने लिखित बयान देने के लिए पहुंचे उन्होंने 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल के साथ 1978, 1986 और 1992 के दंगे की भी जानकारी आयोग को दी है। इन लोगों ने इसकी पुष्टि बयान देने के बाद बाहर आकर की। 
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आयोग ने भी जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई घटना के अलावा 1978 के दंगे के बारे में भी कई सवाल किए। आयोग की ओर से लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में लिखित बयान दर्ज कराने के लिए लोगों को बुलाया गया था। जिसमें सभी ने अपने अपने पक्ष को आयोग के सामने रखा है। 

जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट ने बताया कि मस्जिद में आयोग के सदस्य गए थे। वहां की जानकारी जो पूछी गई है वह दी है। उसके अलावा बवाल से जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछा है। सदर ने कहा कि वह इस बार बयान दर्ज नहीं करा पाए हैं। अगली बार आयोग आएगा तो पूरी तैयारी से बयान दर्ज कराए जाएंगे।
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क्या बोले लोग
शशांक अग्रवाल ने आयोग के सामने बताया कि उसके पिता दिनेश चंद्र शर्मा की 1992 के दंगे में हत्या कर दी गई थी। वह रात को बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने के लिए गए थे। रात को नहीं लौटे और अगले दिन शहजादी सराय के तालाब में उनका शव मिला था। बताया उस समय उनका परिवार हातिम सराय में रहता था जो बाद में पलायन कर गया था। शशांक ने आयोग से मांग की है कि उसके पिता को न्याय मिलना चाहिए।

मोहल्ला कोटपूर्वी निवासी राष्ट्र बंधु रस्तोगी ने बताया कि 1986 के दंगे में उनके पिता भगवत सरन की हत्या की गई थी। वह घर का सामान लेने के लिए गए थे। शहर में नेजा मेला था। इसी दौरान अफवाह फैली के दो मुसलमानों की हत्या हो गई है। और दंगा शुरू हो गया था। राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने अपने पिता को इंसाफ दिलाने की मांग आयोग से रखी है।

भाजपा नेता संजय सांख्यधर ने 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल के संबंध में जानकारी दी और शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठाई। जिला मुख्यालय भी संभल में ही लाने की मांग की। जिससे शहर में अल्पसंख्यक हिंदू परिवारों की सुरक्षा बढ़ सके। संजय सांख्यधर ने बताया कि 24 नवंबर को हुए बवाल से शहर की व्यवस्था बेपटरी हो गई थी। हिंदू परिवारों में डर का माहौल बन गया था।

 

मोहल्ला नखासा निवासी शमा परवीन ने बताया कि उनके पति नदीम 24 नवंबर 2024 को घर पर थे। पुलिस ने इसके बाद भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि वह बीमार हालत में हैं। शमा परवीन ने कहा कि उनके पति का कोई फोटो या वीडियो भी नहीं है। पुलिस ने निर्दोष को जेल भेजा है। अब पूरा परिवार परेशान है। महिला ने आयोग के सामने यह जानकारी रखी है।

1978 दंगे में मुकदमे वापसी का पत्र भी चर्चा में रहा
1978 दंगे के आठ मुकदमे वापसी को लेकर भी आयोग के सामने बात रखी। जिसमें बताया कि 23 दिसंबर 1993 का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जो आरडी शुक्ला विशेष सचिव न्याय विभाग ने मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम को लिखा था। जिसमें दंगे में दर्ज 16 मुकदमों में से आठ मुकदमे वापसी की जानकारी का उल्लेख है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के द्वारा यह मुकदमे वापस कराए गए थे। जो मुकदमे वापस हुए थे उसमें आगजनी, लूट और अन्य गंभीर अपराध शामिल थे।

1978 दंगे के पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की
तहसील के गांव लखौरी निवासी लोकतंत्र रक्षक सेनानी महीपाल सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। जिसमें 1978 के दंगे से पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। साथ ही एक पत्र सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट की कॉपी भी भेजी है। जिसमें लिखा है कि 29 मार्च 1978 के दंगे में काफी हिंदुओं की हत्या की गई थी और लूटपाट भी की थी। प्रतिनिधिमंडल ने उस समय के डीएम फरहत अली को दंगे में लापरवाही का दोषी माना था। लोकतंत्र रक्षक सेनानी ने 1978 के दंगे में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठाई है।

 

सात घंटे तक संभल में रहा न्यायिक आयोग, 51 ने दर्ज कराए लिखित बयान
बवाल मामले में गठित तीन सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग ने संभल में स्थित लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में 51 लोगों से लिखित बयान लिए हैं। करीब सात घंटे तक आयोग के सदस्य संभल में रहे। 20 से 25 लोगों से मौखिक भी जानकारी ली गई। टीम ने जामा मस्जिद और बवाल के क्षेत्रों को भी देखा। साथ ही जामा मस्जिद कमेटी से भी घटना की जानकारी ली।

 

मंगलवार की सुबह 11 बजे से न्यायिक जांच आयोग के सामने लोगों ने पहुंचना शुरू कर दिया था। न्यायिक जांच आयोग में रिटायर्ड जज देवेंद्र अरोड़ा को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। जबकि रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी एके जैन व रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद सदस्य हैं। आयोग के सामने शाम पांच बजे तक 51 लोगों ने लिखित में बयान दर्ज कराए हैं। 20 से 25 लोगों ने मौखिक जानकारी दी है।

 
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सदस्य एके जैन ने कहा कि अभी लिखित बयान लिए गए हैं। इसके बाद आयोग के सदस्य मुरादाबाद के लिए रवाना हो गए। अब अगले सप्ताह आयोग की टीम फिर संभल आएगी। आयोग के बयान लेने के दौरान गेस्ट हाउस पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। वही लोग अंदर भेजे गए हैं जो अपने लिखित में बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे थे। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई, एएसपी श्रीश्चंद्र भी आयोग के रवाना होने तक मौके पर मौजूद रहे।
 
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