19 नवंबर 2024 को दाखिल हुआ था मुकदमा
यह कानूनी विवाद 19 नवंबर 2024 को शुरू हुआ था। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने संभल की चंदाैसी जिला अदालत में वाद दाखिल कर दावा किया था कि शाही जामा मस्जिद का निर्माण मंदिर स्थल पर किया गया है। मुस्लिम पक्ष ने मामले की पोषणीयता को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हालांकि 19 मई 2025 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कोर्ट की निगरानी में सर्वे कराने और मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।
सर्वे के बाद बिगड़े थे हालात
अदालत के आदेश पर 19 नवंबर 2025 को मस्जिद परिसर का सर्वे किया गया था। इसके बाद 24 नवंबर को दोबारा सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा के मामले में पुलिस ने संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली के खिलाफ भी कार्रवाई की थी।
इसके अलावा 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे पर अंतरिम रोक लगाते हुए स्थानीय ट्रायल कोर्ट में विवाद से जुड़ी कार्यवाही पर भी रोक लगा दी थी।