प्रशासनिक अधिकारी मान रहे हैं कि पता लगाना मुश्किल होगा कि उस समय जिन लोगों को मुकदमों में आरोपी बनाया गया था, वह सारे जीवित भी हैं या नहीं। यही शंका गवाहों के मामले भी है। दंगे के मुकदमों में कोर्ट के निष्कर्ष क्या थे, यह ढूंढ पाना भी सात दिन का काम नहीं है। हालांकि, जामा मस्जिद में सर्वे को लेकर हुए बवाल के बाद प्रशासन पुराने दंगों की कड़ी भी जोड़ रहा है और जानकारियां एकत्र की जा रही हैं।
नौ की हुई थी हत्या, 82 पर केस
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक 1978 के संभल दंगे में नौ लोगों की हत्या हुई थी। दंगे में 82 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। मुरादाबाद न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई हुई थी। इसमें किसी का दोष सिद्ध नहीं हुआ था। पीड़ित परिवार दंगे में अपनों को खोने का दर्द आज भी महसूस करते हैं। दंगे में जान गंवाने वाले बनवारी लाल गोयल के बेटे विनीत कुमार गोयल ने दिसंबर में संभल के डीएम व एसपी से मुलाकात की थी। एमएलसी श्रीचंद शर्मा ने भी पत्र लिखकर दंगों की फिर जांच की मांग उठाई थी।
मुकदमों की समीक्षा के लिए मंडलायुक्त ने की थी पहल
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने 46 साल पहले हुए संभल दंगे के मुकदमों की समीक्षा के लिए पहल की थी। इस मामले में उन्होंने अभियोजन अधिकारियों से पूछताछ की थी लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ दिन पहले कहा था कि 1978 में हुए संभल दंगे के मामले में अभी तक किसी को सजा नहीं मिली है। सीएम के इस बयान के बाद प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आ गए थे। कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने दंगे के बारे में जानकारी लेने के लिए समीक्षा बैठक बुलाई। उन्होंने मुकदमों के बारे में जानकारी के लिए अभियोजन अधिकारियों से पूछताछ की।
अधिकारियों ने बताया कि 1978 के दंगे के दौरान हुए मुकदमे अदालत में फाइनल हो चुके हैं। अब उनको खोलना मुश्किल होगा। आखिरकार मंडलायुक्त ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। बताया कि शासन की तरफ से दंगे के बारे में जांच कराने के लिए उन्हें कोई निर्देश नहीं मिले हैं। कोई सूचना भी नहीं मांगी गई है।
डीएम-एसपी नहीं, शासन की कमेटी को जांच का अधिकार
पुराने दंगों के मामले में डीएम या एसपी जांच पड़ताल नहीं कर सकते। इस मामले में शासन के आदेश पर ही जांच हो सकती है। साथ ही जांच करने का अधिकार भी शासन द्वारा गठित कमेटी को होगा। ऐसे में गृह विभाग के सचिव के पत्र के बाद जानकारियां जुटाकर जरूर दी जा सकती हैं लेकिन जांच शासन के आदेश पर ही शुरू होगी। ऐसे मामलों में कैबिनेट स्तर से निर्णय होता है। बहरहाल संभल जिला प्रशासन को लिखे गए पत्र के बाद मुरादाबाद जिला प्रशासन की भागदौड़ भी शुरू हो गई है।
जिला न्यायालय में तलाशने होंगे पुराने मुकदमों के कागज
1978 के मुकदमों के कागज जिला न्यायालय में तलाशने होंगे। हालांकि, यह बिल्कुल भी आसान काम नहीं है। कितने पुराने मुकदमों के कागज कोर्ट से मिल सकते हैं, यह भी किसी को नहीं पता। वहीं पुराने मामले में जांच से पहले यह भी देखना होगा कि आरोपी व गवाह जीवित हैं या नहीं। यदि जीवित हैं तो किस अवस्था में हैं। फिलहाल प्रशासन किसी भी तरह की जांच पड़ताल से इन्कार करते हुए जानकारी जुटाने पर काम कर रहा है। जानकारी एकत्र करनेे के बाद गृह विभाग को भेजी जाएगी।
जनप्रतिनिधियों के पत्र को संदर्भ में लेते हुए संभल जिला प्रशासन से जानकारी मांगी गई है। जहां तक जांच का सवाल है तो जिला प्रशासन को इसका अधिकार नहीं है। यह निर्णय शासन स्तर से होगा और शासन की कमेटी ही दंगे की जांच कर सकती है।
- आंजनेय कुमार सिंह, कमिश्नर, मुरादाबाद
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